8 टिप्पणियाँ

T-27/7 बराहे-रास्त चलन में ये होशियारी रख-अभय कुमार ‘अभय’

बराहे-रास्त चलन में ये होशियारी रख
फ़रेब दिल में लबों पर ख़ुलूस कारी रख

उदास उदास न चेहरे प सोगवारी रख
‘छिपा के यार तबस्सुम में बेक़रारी रख

असर पड़े न पड़े बात वज़्नदार न हो
मगर ज़बान पे अल्फ़ाज़ भारी-भारी रख

ग़लत है गोशानशीनी को ज़िन्दगी कहना
किसी से बैर का रिश्ता किसी से यारी रख

वबाले-जान हुआ करता है ज़ियादा इल्म
तू ख़ुद को जान ले बस इतनी जानकारी रख

लहू-लहू ही सही मेरा तन-बदन लेकिन
बहुत न तू रुखे-ज़ेबा प शर्मसारी रख

मज़ाक़ अपना बनाना है आप ही से ‘अभय’
तो ज़ख़्म-ज़ख़्म की हर तरह पर्दादारी रख

अभय कुमार ‘अभय’ 08171611298-09897201820

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8 comments on “T-27/7 बराहे-रास्त चलन में ये होशियारी रख-अभय कुमार ‘अभय’

  1. सभी हज़रात का दिली शुक्रिया। काविश आपको अच्छी लगी मुझे क़रार मिला।

  2. Abhay saahab sabhi Ash’aar khoob hain mubaarakbaad k saath daad haazir hai qabool kare’n .
    shafique raipuri

  3. ग़लत है गोशानशीनी को ज़िन्दगी कहना
    किसी से बैर का रिश्ता किसी से यारी रख

    वबाले-जान हुआ करता है ज़ियादा इल्म
    तू ख़ुद को जान ले बस इतनी जानकारी रख

    अभय जी,
    बेहतरीन ग़ज़ल के लिये दिली मुबारकबाद.

  4. वाह वाह बहुत खूब अभय साहेब शानदार ग़ज़ल

  5. Abhay ji, khoobsurat gazal huyi hai! Daad kubool kareein.

  6. जनाब अभय साहब बेह्तरीन मुरस्सा ग़ज़ल है बहुत बहुत बधाई आपको

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