19 टिप्पणियाँ

T-27/7 निगाहे-लुत्फ़ो-करम मुझ पे मेरे बारी रख-फ़ज़्ले-अब्बास ‘सैफ़ी’

निगाहे-लुत्फ़ो-करम मुझ पे मेरे बारी रख
जो फ़ैज़ जारी है तेरा वो फ़ैज़ जारी रख

किसी के ऐब गिनाना नहीं हुनर भाई
जो ऐब तुझमें हैं तू उनकी जानकारी रख

लगाये रहता है हर दम नहीं नहीं की रट
कभी तो छोड़ के ज़िद बात कुछ हमारी रख

जिसे उठाना तिरे वास्ते मुहाल रहे
ज़रूरियात की गठरी न इतनी भारी रख

जो बादे-मर्ग भी ख़ाहिश है ज़िंदा रहने की
वफ़ा, ख़ुलूस, मुहब्बत में पायदारी रख

गिला नहीं है मुझे तू भी मुतमइन हो कर
जफ़ा के तीर चलने का काम जारी रख

किसी भी हाल में चेहरे से भी न ज़ाहिर हो
‘छुपा के यार तबस्सुम में बेक़रारी रख’

वो आज आएं हैं फ़ुर्सत निकाल कर ‘सैफ़ी’
जो तेरे दिल में हैं बातें वो बारी-बारी रख

फ़ज़्ले-अब्बास ‘सैफ़ी’ 09826134249

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19 comments on “T-27/7 निगाहे-लुत्फ़ो-करम मुझ पे मेरे बारी रख-फ़ज़्ले-अब्बास ‘सैफ़ी’

  1. Aik achchhi ghazal ke liye hazaroN daad qubul kijiye Saifi Saheb….
    (waquif ansari)

  2. Nigaah e lutf o karam mujh pe mere Baari rakh
    Jo faiz jaari hai tera wo faiz jaari rakh
    Behtareen matle k saath behtareen Ghazal aap ki ghazal BARJASTAGI ki behtareen misaal hai. Daad haazir hai qabool kare’n.
    Umda ghazal k liye mubaarakbaad
    shafique raipuri

  3. निगाहे-लुत्फ़ो-करम मुझ पे मेरे बारी रख
    जो फ़ैज़ जारी है तेरा वो फ़ैज़ जारी रख

    जिसे उठाना तिरे वास्ते मुहाल रहे
    ज़रूरियात की गठरी न इतनी भारी रख

    वो आज आएं हैं फ़ुर्सत निकाल कर ‘सैफ़ी’
    जो तेरे दिल में हैं बातें वो बारी-बारी रख

    बहुत ख़ूब सैफ़ी साहब !
    क्या कहने !

  4. जनाब सैफ़ी साहब बेहद मुरस्सा ग़ज़ल हुई है दिली मुबारक़बाद कुबूल फरमायें

  5. जनाब सैफ़ी साहिब , वाह वाह बहुत ख़ूब, इस शानदार और मुरस्सा ग़ज़ल के लिये ढेरों दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ।

    – समर कबीर

  6. बेहतरीन ग़ज़ल हुई है सैफ़ी साहब खासतौर से दूसरा और पाँचवा शे’र तो खूब हुआ है।
    दिली दाद कुबूल फ़रमायें

  7. निगाहे-लुत्फ़ो-करम मुझ पे मेरे बारी रख
    जो फ़ैज़ जारी है तेरा वो फ़ैज़ जारी रख
    हर रोज़ दोहराने के लिए इस बेहतरीन मत्ले की तामीर के लिए शुक्रिया सैफ़ी भाई.
    शाज़ जहानी

  8. बहुत खूबसूरत गजल ……..बहुत ही खूबसूरत

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