11 Comments

T-27/2 उरूज पाना है तुझको अमल ये जारी रख-समर कबीर

उरूज पाना है तुझको अमल ये जारी रख
ग़ुरूर छोड़ दे,लहजे में ख़ाकसारी रख

तमाम उम्र तिरा साथ ये निभाऐंगे
ख़ुशी को भूल जा, अपने ग़मों से यारी रख

मिला ही करते हैं अक्सर फ़क़ीर राहों में
चले जो घर से तो खीसे में रेज़गारी रख

पहन के खाल यहाँ आदमी की, सड़कों पर
दरिन्दे मिलते हैं, अपनी नज़र शिकारी रख

तिरे भले के लिये बोलते हैं, ऐ नादाँ
कि ज़िद को छोड़ दे कुछ बात भी हमारी रख

चुका दे, जो भी हैं दुनिया के क़र्ज़, दुनिया में
“समर” तू जान पे हरगिज़ न कुछ उधारी रख

“समर कबीर” 09753845522

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

11 comments on “T-27/2 उरूज पाना है तुझको अमल ये जारी रख-समर कबीर

  1. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल समर कबीर साहब.
    वाह वाह..
    क्या कहने.

  2. मुहतरम कबीर साहब
    आदाब

    मिला ही करते हैं अक्सर फ़क़ीर राहों में
    चले जो घर से तो खीसे में रेज़गारी रख
    और
    तिरे भले के लिये बोलते हैं, ऐ नादाँ
    कि ज़िद को छोड़ दे कुछ बात भी हमारी रख
    पर दाद क़ुबूल फरमाएं !

  3. समर कबीर साहब
    वाह क्या ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने।
    ढेरों दाद क़ुबूल करें
    सादर
    पूजा

  4. samar kabeer saheb wah
    तमाम उम्र तिरा साथ ये निभाऐंगे
    ख़ुशी को भूल जा, अपने ग़मों से यारी रख

    अच्छी ग़ज़ल हुई… वाह.,
    नाज़िम

  5. Samar saahab is umda gazal ke liye khas mubarakbaad…sabhi sher achhe hain…waah..
    Regds
    Bimlendu kumar

  6. Bahut pyari gazal sir
    dili daad qubul kijiye
    regards
    Imran

  7. Samir sahab behtarin gazal …bohot bohot mubarak…
    मिला ही करते हैं अक्सर फ़क़ीर राहों में
    चले जो घर से तो खीसे में रेज़गारी रख…iss sher ka to jawab nahi …
    Fazle Abbas Saify ….

  8. मिला ही करते हैं अक्सर फ़क़ीर राहों में
    चले जो घर से तो खीसे में रेज़गारी रख

    पहन के खाल यहाँ आदमी की, सड़कों पर
    दरिन्दे मिलते हैं, अपनी नज़र शिकारी रख

    तिरे भले के लिये बोलते हैं, ऐ नादाँ
    कि ज़िद को छोड़ दे कुछ बात भी हमारी रख
    वाह वाह बहुत खूब समर साहेब क्या बात है लाज़वाब अशआर कहे हैं वाह

  9. बेह्तरीन समर साहब हर शे’र लाजवाब है बधाई आपको

  10. वाह वाह, दूसरी ग़ज़ल भी उस्तादाना आयी, पुराने चावल पुराने ही होते हैं। मुहतरम समर कबीर साहब उम्दा ग़ज़ल के लिए दाद क़ुबूल फरमाइये

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: