7 Comments

T-26/37 बिछड़ कर वो सरे-मंज़िल गया है-द्विजेन्द्र ‘द्विज’

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिसे तरह किया गया

नसीबों से कोई गर मिल गया है
तो पहले उस पे अपना दिल गया है

करेगा याद क्या क़ातिल को अपने
तड़पता याँ से जो बिस्मिल गया है

लगे हैं ज़ख़्म किस की तेग़ के ये
कि जैसे फूट सीना खिल गया है

ख़ुदा के वास्ते उस को न लाओ
अभी तो याँ से वो क़ातिल गया है

कोई मजनूँ से टुक झूटे ही कह दे
कि लैला का अभी महमिल गया है

अगर टुक की है हम ने जुम्बिश उस को
पहाड़ अपनी जगह से हिल गया है

कोई ऐ ‘मुसहफ़ी’ उस से ये कह दे
दुआ देता तुझे साइल गया

——————————————-

द्विजेन्द्र ‘द्विज’ साहब की तरही ग़ज़ल

बिछड़ कर वो सरे-मंज़िल गया है
फिर उसके साथ क्यों ये दिल गया है

मुझे लगता है तू भी हिल गया है
तिरा भी क्या किसी पे दिल गया है

सुनी है किसके आने की ख़बर ये
तिरा चेहरा अचानक खिल गया है

बज़ाहिर तू नज़र आता था पत्थर
तिरा सीना भी आख़िर छिल गया है

ऐ तन्हाई मिरे सीने से लग जा
मुझे कोई तो हमदम मिल गया है

तुझे आख़िर यहीं आना पड़ेगा
कभी मझधार में साहिल गया है?

अजूबा है मिरे क़ातिल की ख़ूबी
दुआ देता उसे बिस्मिल गया है

ये महरूमी नहीं तो और क्या है
तिरे दर से कोई साइल गया है

हुआ क्या अब तिरी गुफ़्तार को ये
तिरा मुँह क्यों अचानक सिल गया है

तो क्या मजनूँ की थी आहो-फ़ुग़ाँ ये
‘पहाड़ अपनी जगह से हिल गया है’

ग़मे-जानाँ ग़मे-दुनिया से आख़िर
ग़ज़ल में किस तरह घुल मिल गया है

द्विजेन्द्र ‘द्विज’ 09418465008

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

7 comments on “T-26/37 बिछड़ कर वो सरे-मंज़िल गया है-द्विजेन्द्र ‘द्विज’

  1. Dwijendra ji

    Is sher par khaas daad kubool karein
    सुनी है किसके आने की ख़बर ये
    तिरा चेहरा अचानक खिल गया है
    Behtareen gazal huyi hai!

  2. Behtreen ghazal hui hai sahab.daad hazir hai.

  3. khoobsurat ghazal huyi hai…in qawaafi me faseeh kalaam kahna bada mushkil hai..magar aap ne kamaal kiya hai…waahh

    • आदरणीय अनाम साहब
      हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
      आपका नाम पता लग जाए तो हौसला चौगुना हो जाएगा।
      शुक्रिया

  4. बज़ाहिर तू नज़र आता था पत्थर
    तिरा सीना भी आख़िर छिल गया है

    तुझे आख़िर यहीं आना पड़ेगा
    कभी मझधार में साहिल गया है?

    अजूबा है मिरे क़ातिल की ख़ूबी
    दुआ देता उसे बिस्मिल गया है

    Kamaal…Bemisaal…Dwij Bhai…Jiyo…Behtareen ghazal kahi hai aapne…dheron daad kabool karen…

    Neeraj

    • आदारणीय नीरज भाई साहब
      आप यहां आए
      आशीर्वाद दिया
      मेरा ग़ज़ल कहना सार्थक हो गया।
      आभार
      सादर

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: