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T-26/35 कब ज़मीं आसमाँ से उठता है-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर

हज़रते मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिसकी ज़मीन को तरह किया गया

अहले-दिल गर जहाँ से उठता है
इक जहाँ जिस्मो-जाँ से उठता है

चलो ऐ हम-रहो ग़नीमत है
जो क़दम इस जहाँ से उठता है

जम्अ रखते नहीं, नहीं मालूम
ख़र्च अपना कहाँ से उठता है

गर नक़ाब उसके मुंह से उट्ठी नईं
शोर क्यों कारवां से उठता है

वाए बेताक़ती-ओ-बेसब्री
पर्दा जब दरमियाँ से उठता है

फिर वहीँ गिर पड़े है परवाना
गर टुक इक शम्मदां से उठता है

क़िस्सा-ए-‘मुसहफ़ी’ सुनाकर यार
इश्क़ इस दास्ताँ से उठता है

—————————————

इरशाद ख़ान सिकंदर की तरही ग़ज़ल

कब ज़मीं आसमाँ से उठता है
इश्क़, मुझ नातवाँ से उठता है

इक लपट उठती है कलेजे में
कोई जब दरमियाँ से उठता है

आग चुप चुप है पर धुआं सा कुछ
दिल के कच्चे मकाँ से उठता है

मसख़रो ! मिसरा-ए-ग़ज़ल है, ये
आँसुओं की ज़बाँ से उठता है

कैसे मानें अदीब हम उसको
फ़ित्ना जिसके बयाँ से उठता है

जब्र आती है तब क़यामत जब
सब्र हिन्दोस्ताँ से उठता है

पर निकल आये हैं तअस्सुब के
शोर अम्नो-अमां से उठता है

इरशाद ख़ान ‘सिकंदर 09818354784

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10 comments on “T-26/35 कब ज़मीं आसमाँ से उठता है-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर

  1. इक लपट उठती है कलेजे में
    कोई जब दरमियाँ से उठता है

    आग चुप चुप है पर धुआं सा कुछ
    दिल के कच्चे मकाँ से उठता है

    kya kehne DADA.. waah

  2. उम्दा ग़ज़ल
    हालात ए हाजिरा से काफी मोतास्सिर ग़ज़ल कही है ।भई वाह

  3. Irshad Bhai khoob ghazal kahi hai aapne.. mubarakbaad!!
    matle par khusoosi daad!!

  4. EK LAPAK UTHTI HAI KALEJE MEN
    JAB KOI DARMIYAN SE UTHTA HAI.
    Irshad bhai, kya achchi ghazal kahi hai apne, mubarakbad

  5. Kaise maane’n adeeb ham usko
    fitna jis k bayaa’n se ut’tha hai

    Waah waah sikandar sahab behtareen ghazal ka behtareen sher. Sainkdo’n daad

  6. Asslam alaikum dada
    इक लपट उठती है कलेजे में
    कोई जब दरमियाँ से उठता है

    आग चुप चुप है पर धुआं सा कुछ
    दिल के कच्चे मकाँ से उठता है
    BAHUT pyari gazal hui hai
    dili daad qubul kijiye
    SAdar

  7. इक लपट उठती है कलेजे में
    कोई जब दरमियाँ से उठता है

    आग चुप चुप है पर धुआं सा कुछ
    दिल के कच्चे मकाँ से उठता है

    मसख़रो ! मिसरा-ए-ग़ज़ल है, ये
    आँसुओं की ज़बाँ से उठता है

    SUBHAN ALLAH….WAAH WAAH WAAH…

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