28 टिप्पणियाँ

T-26/33 इश्क़ को छाँव मैं समझा था भभूका निकला-तुफ़ैल चतुर्वेदी

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिसकी ज़मीन को तरह किया गया

रात पर्दे से ज़रा मुहँ जो किसू का निकला
शोला समझा था उसे मैं पे भभूका निकला

महरो-मह उस की फबन देख के हैरान रहे
जब वरक़ यार की तस्वीरे-दो-रू का निकला

ये अदा देख के कितनों का हुआ काम तमाम
नीमचा कल जो टुक उस अरबदा-जू का निकला

मर गई सर्व पे जब हो के तस्ददुक़ क़ुमरी
उस से उस दम भी न तौक़ अपने गुलू का निकला

‘मुसहफ़ी’ हम तो ये समझते थे कि होगा कोई ज़ख़्म
तेरे दिल में तो बहुत काम रफ़ू का निकला

——————————————

आलीमरतबत के अज़ीमुश्शान दरबार में ग़ुलाम इब्ने-ग़ुलाम तुफ़ैल चतुर्वेदी की हाज़िरी

इश्क़ को छाँव मैं समझा था भभूका निकला
रास्ता पूरी तबीयत से ये लू का निकला

कोई मंज़र नहीं दुनिया में हमेशा आबाद
जिसको ख़ुशरंग मैं समझा था वो हू का निकला

डांटा-फटकारा भी, समझाया भी माना ई नईं
दिल को माने था मैं अपना ये किसू का निकला

प्यारे हर ज़ख़्म के होठों पे हँसी तैर गयी
देख आते ही तिरे काम रफ़ू का निकला

उसके दीदार दमे-मार्ग मयस्सर न हुए
मुझ-जनाज़ा भी मेरी आँखों सा भूका निकला

कौन रहता है किसी साथ सदा, उनने भी
आग दिखलाई मेरे लाशे को फूका निकला

तुफ़ैल चतुर्वेदी                          09711296239

Advertisements

28 comments on “T-26/33 इश्क़ को छाँव मैं समझा था भभूका निकला-तुफ़ैल चतुर्वेदी

  1. ग़ज़ल का पहला ही शेर, बस……क्या कहूँ ! होश उड़ा गया.

    इश्क़ को छाँव मैं समझा था भभूका निकला
    रास्ता पूरी तबीयत से ये लू का निकला

    वाह…….वाह !! लाजबाब !

    मालिक करे आप हजार साल जियें तुफ़ैल साहिब !

  2. प्यारे हर ज़ख़्म के होठों पे हँसी तैर गयी
    देख आते ही तिरे काम रफ़ू का निकला

    वाह सर जी खूब ग़ज़ल कही है

  3. Nayee peeshi.ke.liye ek nayaa.rang, ek tohfaa hai ye..bhaasha aur.lahje ki drishti.se…

    Saadar
    Bimalendu

  4. इश्क़ को छाँव मैं समझा था भभूका निकला
    रास्ता पूरी तबीयत से ये लू का निकला
    कोई मंज़र नहीं दुनिया में हमेशा आबाद
    जिसको ख़ुशरंग मैं समझा था वो हू का निकला
    डांटा-फटकारा भी, समझाया भी माना ई नईं
    दिल को माने था मैं अपना ये किसू का निकला
    प्यारे हर ज़ख़्म के होठों पे हँसी तैर गयी
    देख आते ही तिरे काम रफ़ू का निकला
    waaaaaaaaaaahhhh waah bhut khoob tufail saaheb lazwaab

  5. Ustadana ghazal… hameiN aise kawafi ka is tarah istemaal karna jane kab aaega..

    Shandaar dada!!

  6. तुफ़ैल साहेब
    आदाब
    किसी ग़ज़ल को तरह करते वक़्त अपनी शायरी को भी उसी दौर में ले जाने का कमाल आप ही कर सकते थे. ….. माना ई नईं……..वाह, वाह..
    शाज़

  7. प्यारे हर ज़ख़्म के होठों पे हँसी तैर गयी।
    देख आते ही तिरे काम रफ़ू का निकला॥

    दादा! क्या ही अच्छा शेर हुआ है। वाह वाह वाह। इस तरही का आयोजन कर के आप ने वास्तविक अर्थ में अपने प्रथम-पूर्वज को श्रद्धाञ्जलि दी है। आप साधुवाद के अधिकारी हैं।

    • नवीन, हज़रते-मीर और हज़रते-मुसहफ़ी वो पहले लोग हैं जिन्होंने ग़ज़ल को अवाम में मक़बूल किया। इनकी चौखट तक तरही के बहाने हम सब की रसाई हो गयी, माथा नवा लिया ये ही बड़ी बात है। अच्छी बात ये है कि सब हज़रात भरपूर मेहनत कर रहे हैं और अच्छी गज़लें आ रही हैं। ख़ुश रहिये

  8. Aaj k daur ka shaair saalo’n peeche jaa kar Aslaaf ke andaaz ko apnaate huye Ghazal kahe to use ” KAMAAL” se hi taabeer kiya jaayega, aur aisa kamaal aap hi ka hissa hai TUFAIL sahab, MUS’HAFI sahab ki ghazal ki zameen k saath poora poora insaaf kiya hai aap ne “BAHUT BAHUT DAAD AUR MUBAARAK BAAD”

  9. डांटा-फटकारा भी, समझाया भी माना ई नईं
    दिल को माने था मैं अपना ये किसू का निकला

    AHA HA HA HA ….KYA MASOOM SA SHER HAI…WAAH….JIYO MIYAN

  10. दद्दा आप तो समां बान्ह दिह्यो।बहुत दिन बाद तरही मा आये औ का कहें माने कि जबरदस्त…

  11. प्रणाम बड़े दादा
    बहुत ही प्यारी ग़ज़ल

  12. नवनीत, पूजा, द्विज शुक्रिया। मुझे ग़ज़ल और मेहनत से कहना चाहिये मगर कुछ तरही की दब-सट, कुछ ज़ाती उलझनें मौक़ा ही नहीं दे रहीं। बस सरकार की हाज़िरी बजाना फ़र्ज़ था सो बंदगी अर्ज़ की। ख़ुश रहिये

  13. मास्टर स्ट्रोक।
    लाजवाब।
    ज़िंदाबाद।

  14. Pranaam dada
    Mein to kya hi kahun..
    Bahut shukriya itni khoobsoorat gazal se milane ke liye.
    Sadar
    Pooja

  15. आदरणीय दादा,
    प्रणाम।
    अस्‍ल में उस्‍तादों की जमीन को उस्‍ताद कैसे आसमान करते हैं, यह ग़ज़ल कह रही है। बहुत खूब। इससे अधिक कहने की औकात नहीं है मेरी।

    सादर
    नवनीत

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: