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T-26/30 बात आ चुकी है कारगरो-रायगां के बीच-बकुल देव

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिस ज़मीं को तरह किया गया

कुछ इन दिनों है और हवा गुलसितां के बीच
बुलबुल से ये कहो कि रहे आस्तां के बीच

अब उन मुसाफ़िरों का निशां किस से पूछिये
जो ख़ाक़ हो के रह गये रेगे-रवां के बीच

करता नहीं कभी जो रहम मेरे हाल पर
है क्या ग़ज़ब तिरे दिले ना-मेहरबां के बीच

फेंका किया हूं सब जो मैं आहों की बर्छियां
सूराख़ पड़ गये हैं तमाम आसमां के बीच

सैयाद से कहो कि अगर हम असीर हों
हम को चमन का मुंह न दिखा दें ख़िज़ां के बीच

तू गो कि पाक साफ़ है लेकिन मैं क्या करूं
यां सौ मुख़ातरे हैं दिले-बदग़ुमां के बीच

ऐ ‘मुसहफ़ी’ तू क़िस्सा-ए-अस्मत को फिर के कह
अपना तो जी लगा बहुत इस दास्तां के बीच

—————————————-

बकुल देव की तरही ग़ज़ल

बात आ चुकी है कारगरो-रायगां के बीच
अपनी सदा फिरे है ज़मीं-आसमां के बीच

जी चाहता है इसको सहारा बनाया जाय
इक पांव टिक रहा है जो सूदो-ज़ियां के बीच

इक वक़्फ़ा-ए-मआ़नी है लफ़्ज़ों के दरमियां
सुनना मिरी ख़मोशी को मेरे बयां के बीच

क्यूं दास्तानगो पे न इल्ज़ाम हम धरें
किरदार हो रहे हैं ख़ता दास्तां के बीच

साहिल भी खींचता है सफ़र की कशिश भी है
कश्ती फंसी है मुख़्तसरो-बेकरां के बीच

हम तय न कर सकेंगे सितारों का ये सफ़र
तरीक़ियां बहुत हैं तिरी कहकशां के बीच

गर्दो-ग़ुबार बैठता जाए है दम-ब-दम
अफ़वाह कुछ उड़ा दें चलो कारवां के बीच

हद्दे-शिकस्तगी प रगे-दिल को ला के छोड़
कुछ हसरतों का तीर चढा है कमां के बीच

बकुल देव 09672992110

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6 comments on “T-26/30 बात आ चुकी है कारगरो-रायगां के बीच-बकुल देव

  1. Waahh..umdaa ghazal

  2. हम तय न कर सकेंगे सितारों का ये सफ़र
    तरीक़ियां बहुत हैं तिरी कहकशां के बीच

    AHA HA HA….KYA KAHEN…BEJOD

  3. ये हज़रत की ख़ासी सख़्त ज़मीन है और बीच रदीफ़ को किनारे लगाना है। आप मुहतरम की रविश पर भरपूर तैयारी से चले हैं और अच्छी ग़ज़ल कही। वाह वाह दाद क़ुबूल फ़रमाइये

  4. हम तय न कर सकेंगे सितारों का ये सफ़र
    तरीक़ियां बहुत हैं तिरी कहकशां के बीच

    आहहहहहहहहह… बकुल भाई।
    क्‍या कहूं। सारी ग़ज़ल बहुत खूब लेकिन इस शे’र का असर हमेशा रहेगा।
    भरपूर कोटेबिलिटी और कई संदर्भ…. आय हाय।

    लूट लिया साहब।

    सादर
    नवनीत

  5. Bahul Deo sahab
    Umda ghazal ke liye daad qubool Karen.

  6. Bakuk deo ji khoobsurat ghazak k liye daad haazir hai qabool kare’n

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