11 Comments

T-26/29 बात गर सच्‍ची है तक्‍़सीर, भली लगती है-नवनीत शर्मा

ह़ज़रत मुसहफ़ी साहब की ग़ज़ल जिसे तरही किया गया

पांव में क़ैस से ज़ंजीर भली लगती है
यूं ही दीवाने की तस्‍वीर भली लगती है

अपनी क्‍या तुझसे कहूं तू ही कह अपनी मुझसे
कि मुझे तेरी ही तक़रीर भली लगती है

खुशनुमां है तिरे आरिज़ पे ये ख़त यूं जिस तरह
गिर्द कु़रआन के तफ़्सीर भली लगती है

जब मिरे ख़ून में होती है वो रंगीं क़ातिल
उस घड़ी क्‍या तिरी शमशीर भली लगती है

होती है आशिक़ो-माशूक़ की जिसमें तस्‍वीर
अपनी आंखों को वो तामीर भली लगती है

मेरी तस्‍वीर को ग़मनाक़ तू खींच ऐ मानी
शक्ल उश्‍शाक़ की दिलगीर भली लगती है

मुसहफ़ी बाजे है नौबत तो दरे-आसिफ़ पर
क्‍या ही आवाज़े-बमो-ज़ीर भली लगती है

————————————————

नवनीत शर्मा की तरही ग़ज़ल

बात गर सच्‍ची है तक्‍़सीर, भली लगती है
फिर तो कोई भी हो ताज़ीर, भली लगती है

हाथ में प्‍यार से बच्‍चे ने संभाला जुगनू
हर अंधेरे में ये तस्‍वीर भली लगती है

ज़िन्दगी तुझसे है फूलों की तवक़्क़ो किसको
छोड़ फिर हमपे कोई तीर! भली लगती है

हाथ या पांव में या तौक़ गले का ही सही
हो ये कैसी, किसे ज़ंजीर भली लगती है?

चाक दामन हो तो चेहरे से जुनूं भी झलके
‘यूं ही दीवाने की तस्‍वीर भली लगती है’

बात दस्‍तार पे आ जाए तो सच है न कहो?
नर्म हाथों में भी शमशीर भली लगती है

जिनके घर मलबे में तब्दील हुए हैं उनको
अब कहां वादी-ए-कश्‍मीर भली लगती है

हुक्म यादों का है सीने से लगा कर रक्‍खो
वरना क्‍या दर्द की जागीर भली लगती है?

ज़िक्र हो फूल का बस फूल का जिसमें, ऐसी
साहबे-वक्‍़त को तक़रीर भली लगती है

है पता मुझको भी बर्बाद हुआ हूं कैसे
बस तिरे लफ़्ज़ों में तफ़्सीर भली लगती है

मेरे हाथों ने किया जो वो हुआ है अब तक
चुप-सी अपनी मुझे तक़दीर भली लगती है

अश्क तो खू़ब थे क़तरा भी बहाया न कभी
मैं नहीं वो जिसे तशहीर भली लगती है

दिल की दीवार गिरी है तो उठाओ ‘नवनीत’
शह्रे-बर्बाद में तामीर भली लगती है

नवनीत शर्मा 09418040160

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

11 comments on “T-26/29 बात गर सच्‍ची है तक्‍़सीर, भली लगती है-नवनीत शर्मा

  1. हाथ में प्यार से बच्चे ने संभाला जुगनू
    हर अंधेरे में ये तस्वीर भली लगती है
    पूरी ग़ज़ल बेहद उम्दा ..इस शेर का जवाब नहीं ..वाह वाह

  2. Navneet bhai kuchh nae kawafi dekhne ko mile, khoobsurat mazmoon liye mukammal ghazal.. daad qubool kijiyel!!

  3. हाय क्या मासूम शेर कहा। मेरा ज़हन यहीं ठिठक कर रह गया। इस शेर में बहुत मीठी ख़ुश्बू है। ये शेर अदब में इज़ाफ़ा कर रहा है। वाह वाह

    हाथ में प्‍यार से बच्‍चे ने संभाला जुगनू
    हर अंधेरे में ये तस्‍वीर भली लगती है

  4. Waah waah Navneet ji kya khoobsurat matla kaha hai waah, Ghazal k sabhi khoob hain DAAD haazir hai qabool kare’n.

  5. Kya khoob gazal hui hae Navneet ji
    Daad qubool karein
    Sadar
    Pooja

  6. दिल की दीवार गिरी है तो उठाओ ‘नवनीत’
    शह्रे-बर्बाद में तामीर भली लगती है

    Kya kahne Navneet Bhai..
    Behad khoobsoorat ghazal.
    Mubaarak.

  7. Wahhhhhhh wahhhhhhh dada
    kya ghazal hui hai
    Dili daad qubul kijiye
    sadar
    Imran

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: