9 टिप्पणियाँ

T-26/24 गुफ़्तार की इक सूरत इस तर्ह निकाली है-बकुल देव

हज़रत मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिस ज़मीन को तरह किया गया

हर-चंद के बात अपनी कब लुत्फ़ से ख़ाली है
पर यार न समझें तो ये बात निराली है

आग़ोश में हैं वो और पहलू मिरा ख़ाली है
माशूक़ मिरा गोया तस्वीरे-ख़याली है

क्या डर है अगर उस ने दर से मुझे उठवाया
कहते है तग़ीरी में आशिक़ की बहाली है

बालीं पे जब आया है बीमार की तू अपने
तब रूह के क़ाबिज़ ने जान उस की निकाली है

मैं हाल बयाँ अपना करता हूँ ग़ज़ल कह के
इस वास्ते अब मेरा जो शेर है हाली है

मेंहदी के लगाने में फ़ुर्ती ये नहीं देखी
ज़ालिम ने हथेली पर सरसों सी जमा ली है

हर-चंद के परवाना जन जाने में है आँधी
पर शम्म भी आतिश में जी झोंकने वाली है

मानी ने शबीह उस की क्या सोच के खींची थी
मू-ए-कमर उस के की तस्वीर ख़याली है

ज़ाहिर है के जागे हो तुम रात कहीं रह कर
आँखों के नशे की तो कुछ थोड़ी सी लाली है

मुक़दूर मगर कब था क़ुर्बान हैं हम उस के
दामन की तिरे जिस ने ये झोंक सँभाली है

ऐ ‘मुसहफ़ी’ है तेरा इतना जो सुख़न चस्पाँ
क्या तूने जवाँ दरज़न घर में कोई डाली है

—————————————

बकुल देव साहब की ग़ज़ल

गुफ़्तार की इक सूरत इस तर्ह निकाली है
होना था बयां जिसको वो बात दबा ली है

सीने में बपा हरदम हंगामा सा है कोई
यानी कि मकीं इसका बाग़ी है वबाली है

वो ख़्वाब करे हिजरत जागीरे-निगह से क्यूं
जिसको कि कोई दम तक उम्मीदे-बहाली है

लफ़्जों की उरूज़ी है ‘तारीख़ लिखें ख़ूं से’
सुनने में तो अच्छी है पर बात ज़वाली है

लग जाती है इक चुप सी पूछें जो कभी हालात
देखो तो जवाब उसका किस दर्जा सवाली है

तासीरे-ज़िया दिल की लगती है भली दिल को
ग़ुल कर के दिये सारे ये शम्म जला ली है

ज़रख़ेज़ ज़मीं इतनी किसकी है ‘बकुल’ जिस पर
हर एक सुख़नवर ने फ़स्ल अपनी उगा ली है

बकुल देव 09672992110

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9 comments on “T-26/24 गुफ़्तार की इक सूरत इस तर्ह निकाली है-बकुल देव

  1. बकुल साहब मत्ले से मख़्ते तक क्या धारदार ग़ज़ल कही है। वाह वाह सैकड़ों दाद

  2. लफ़्जों की उरूज़ी है ‘तारीख़ लिखें ख़ूं से’
    सुनने में तो अच्छी है पर बात ज़वाली है

    आदरणीय भाई बकुल देव जी,

    बहुत खूब कलाम।

    दिली दाद हाजि़र है।

    सादर
    नवनीत

  3. बकुल भाई
    बेहतरीन ग़ज़ल है
    गुफ़्तार की इक सूरत इस तर्ह निकाली है
    होना था बयां जिसको वो बात दबा ली है
    वाह क्या मतला है वाह वाह !!!!

    ज़रख़ेज़ ज़मीं इतनी किसकी है ‘बकुल’ जिस पर
    हर एक सुख़नवर ने फ़स्ल अपनी उगा ली है
    मकता भी बेहतरीन है !

  4. pyari zameen me pyari ghazal hui bakul bhai
    mubarakbaad qubool keejiye

  5. Kya kehne Bakul bhai..

    लग जाती है इक चुप सी पूछें जो कभी हालात
    देखो तो जवाब उसका किस दर्जा सवाली है

    waaaaaaaaaaah!!!!

  6. सीने में बपा हरदम हंगामा सा है कोई
    यानी कि मकीं इसका बाग़ी है वबाली है
    बहुत achi gazal hui sir
    dili daad qubul kijiye

  7. बहुत उम्दा ग़ज़ल कही बकुल देव साहब।
    दाद हाज़िर है।

  8. जनाब बकुल देव साहिब बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें

    समर कबीर

  9. जनाब बकुल देव साहिब बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें

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