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T-26/17 जान ये इंतज़ार कैसा है-पूजा भाटिया

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिसमें तरही ग़ज़ल कही गयी

दिल को ये इज़ितरार कैसा है
देखियो बेक़रार कैसा है

एक बोसा भी दे नहीं सकता
मुझको प्यारे, तू यार कैसा है

कुश्ता-ए-तेग़े-नाज़ क्या जाने
ख़ंजरे-आबदार कैसा है

हर घड़ी गालियाँ ही देते हो
जान मेरी ये प्यार कैसा है

मय नहीं पी कियूं छुपाते हो
अंखड़ियों में ख़ुमार कैसा है

और तो हैं ही ये तो कह बारे
‘मुसहफ़ी’ दोस्त-दार कैसा है

हज़रते-ग़ुलाम हमदानी मुसहफ़ी

———————————-

पूजा साहिबा की तरही की ग़ज़ल

जान ये इंतज़ार कैसा है
हिज़्र में भी क़रार कैसा है

तेरी बातों का ज़ख्म है अब तक
देख तेरा शिकार कैसा है

दिल की धड़कन सुनी तो वो बोले
ये खनकता सितार कैसा है

नब्ज़ ने लौटते ही पूछा था
सूने दिल का दयार कैसा है

मेरे आँसू उसे तसल्ली दें
मुझको ये उससे प्यार कैसा है

मुझ में हिम्मत नहीं लगाऊँ दिल
और देखूं कि प्यार कैसा है

रूह के ज़ख़्म जिस्म से हैं अयाँ
पैरहन तार-तार कैसा है

फूल के हाल से में वाक़िफ़ हूँ
तुम बताओ कि ख़ार कैसा है

वो रखेगा मिरा भरम बाक़ी
उसपे ये ऐतबार कैसा है

पूजा भाटिया 08425848550

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26 comments on “T-26/17 जान ये इंतज़ार कैसा है-पूजा भाटिया

  1. Behtareen ghazal hai. Mubarakbad.is zameen men kahna mushkil lekin aapne aasan kar liya.

  2. नब्ज़ ने लौटते ही पूछा था
    सूने दिल का दयार कैसा है

    रूह के ज़ख़्म जिस्म से हैं अयाँ
    पैरहन तार-तार कैसा है

    फूल के हाल से में वाक़िफ़ हूँ
    तुम बताओ कि ख़ार कैसा है

    JIYO POOJA JI….WAAH…BEHTAREEN GHAZAL KAHI HAI…

  3. बेटा बहुत अच्छे शेर कह रही हैं। जीती रहिये। इस शेर पर हज़ारों दाद वाह वाह वाह

    नब्ज़ ने लौटते ही पूछा था
    सूने दिल का दयार कैसा है

  4. दिल की धड़कन सुनी तो वो बोले
    ये खनकता सितार कैसा है

    नब्ज़ ने लौटते ही पूछा था
    सूने दिल का दयार कैसा है

    बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है बधाई …………………

  5. kya kehne ..2 ghazalen aur dono ek se badhkar ek.. dili daad Puja Ji

  6. नब्ज़ ने लौटते ही पूछा था
    सूने दिल का दयार कैसा है

    मेरे आँसू उसे तसल्ली दें
    मुझको ये उससे प्यार कैसा है

    मुझ में हिम्मत नहीं लगाऊँ दिल
    और देखूं कि प्यार कैसा है

    रूह के ज़ख़्म जिस्म से हैं अयाँ
    पैरहन तार-तार कैसा है
    बहुत प्यारी ग़ज़ल पूजा जी
    दिली दाद क़ुबूल कीजिये
    सादर

  7. Wah wah wah pooja ji kya achchi ghazal kahi hai aapne… Khaar kaiaa hai ko kitne tameez se aapne apne khayaal ka markaz banaya hai… Bahot khoob… Zinsabaad

  8. sab kuch achcha hai… 🙂

    Badhiya ghazal Pooja ji!! waaaaaaah!!!

  9. रूह के ज़ख्म जिस्म से हैं अयां
    पैरहन तार तार कैसा है।
    क्या ही अच्छा शेयर है। आपकी पूरी ग़ज़ल दाद है। मुबारकबाद क़ुबूल फरमाये पूजा जी।

  10. पूजा साहिबा बहुत अच्छी ग़ज़ल पेश की है ।

    बधाई बधाई

  11. मोहतरमा पूजा भाटिया जी… बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं

  12. वाह बहुत खूब पूजा जी

  13. तेरी बातों का ज़ख्म है अब तक
    देख तेरा शिकार कैसा है

    दिल की धड़कन सुनी तो वो बोले
    ये खनकता सितार कैसा है

    नब्ज़ ने लौटते ही पूछा था
    सूने दिल का दयार कैसा है

    रूह के ज़ख़्म जिस्म से हैं अयाँ
    पैरहन तार-तार कैसा है

    बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल पूजा जी.
    मुबारक़.

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