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T-26/9 ज़िन्दगी तेरे राज़दाँ हैं हम-समर कबीर

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिस ज़मीन को तरह किया गया

यादगारे-गुजि़श्‍तगां हैं हम
ख़ूब देखा तो फिर कहां हैं हम

शम्अ की तरह बज़्मे-गेती में
दाग़ बैठे हैं और रवां हैं हम

रहे जाते हैं पीछे यारों से
गर्दे-दुम्‍बाले कारवां हैं हम

रख न ख़ंजर को हाथ से क़ातिल
तेरे कुश्‍तों में नीमजां हैं हम

आबयारे-सुख़न है अपनी ज़ुबां
लफ़्ज़ो-मा’नी के बाग़बां हैं हम

तू ही तू है जो ख़ूब ग़ौर करें
एक धोका सा दर्मियां हैं हम

दावते-तेग़ के तो क़ाबिल हैं
गो कि इक मुश्ते-उस्‍तुख्‍़वां हैं हम

रंगे-रुख़ पर हमारे ज़र्दी सी
नज़र आती है क्‍या खि़ज़ां हैं हम

गो किया सर्द हम को पीरी ने
पर अभी तब्‍अ में जवां हैं हम

और भी हम को रहने दे चंदे
गो तिरी तब्‍अ पर गिरां हैं हम

‘मुसहफ़ी’ शाइरी रही है कहां
अब तो मजलिस के रोज़ाख्‍़वां हैं हम

_________________________________

समर कबीर साहब की तरही ग़ज़ल नं-2 :-

ज़िन्दगी तेरे राज़दाँ हैं हम
सब समझते हैं बेज़बाँ हैं हम

नीचे धरती है आसमाँ ऊपर
और दोनों के दरमियाँ हैं हम

हम तुम्हें क्या बताऐं ऐ यारों
ख़ुद नहीं जानते कहाँ हैं हम

हक़बयानी हमारा शेवा है
एक मुद्दत से बेमकाँ हैं हम

लोग चौपाल में सुनाते हैं
एक दिलचस्प दास्ताँ हैं हम

पहले की बात और थी साहिब
आज कल तो बहुत गिराँ हैं हम

झूटी तारीफ़ हम नहीं करते
क़द्रदानों के क़द्रदाँ हैं हम

उम्र पचपन की हो कि साठ की हो
आप कहते रहें जवाँ हैं हम

नुक्ताचीनी करेंगे क्या तुझ पर
ख़ुद ही अपने से बदगुमाँ हैं हम

ऐ “समर” नीले आसमाँ की तरह
लोग कहते हैं बेकराँ हैं हम

“समर कबीर” 09753845522

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7 comments on “T-26/9 ज़िन्दगी तेरे राज़दाँ हैं हम-समर कबीर

  1. इस ज़मीन पर एक और अच्छी ग़ज़ल पढने को मिली। बढिया ग़ज़ल। ये दो अशआर कुछ ख़ास लगे:-

    हक़बयानी हमारा शेवा है।
    एक मुद्दत से बेमकाँ हैं हम॥

    लोग चौपाल में सुनाते हैं।
    एक दिलचस्प दास्ताँ हैं हम॥

  2. पूरी ग़ज़ल ज़बरदस्त मगर मत्ला तो क़ारी वार है। वाह वाह दाद हाज़िर है, क़ुबूल फ़रमाइये

  3. ख़ूबसूरत शेरों से सजी ग़ज़ल के लिए
    दाद क़ुबूल फरमाएं समर कबीर साहब।

  4. और दोनों के दरमियाँ हैं हम…
    ख़ुद नहीं जानते कहाँ हैं हम…
    समर कबीर साहब वाह….खूब हुई है ग़ज़ल
    बधाई
    सादर
    पूजा

  5. Samir sahab khoob gazal huyi, matlaa ka jawaab nahi!!

  6. JHOOTI TAAREEF HAM NAHIN KARTE
    QADR DAANON KE QADRDAAN HAIN HAM……………SAMAR KABEER SAHEB, MUBARAKBAAD QUBOOL FARMAYEN

  7. ज़िन्दगी तेरे राज़दाँ हैं हम
    सब समझते हैं बेज़बाँ हैं हम

    बहुत अच्छा मत्ला समर साहब !
    दूसरी अच्छी ग़ज़ल के लिये मुबारक़.

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