22 टिप्पणियाँ

T-26/10 दिल न टूटे तो प्यार कैसा है-शाहिद हसन ‘शाहिद’

हज़रते मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिस पर ग़ज़ल तरह की गई

दिल को ये इज़ितरार कैसा है
देखियो बेक़रार कैसा है

एक बोसा भी दे नहीं सकता
मुझ को प्यारे ! तू यार कैसा है

कुश्ता-ए-तेग़े-नाज़ क्या जाने
ख़ंजरे-आबदार कैसा है

हर घड़ी गालियाँ ही देते हो
जान मेरी ये प्यार कैसा है

मय नहीं पी कियूं छुपाते हो
अंखड़ियों में ख़ुमार कैसा है

और तो हैं ही ये तो कह बारे
‘मुसहफ़ी’ दोस्त-दार कैसा है

हज़रते-ग़ुलाम हमदानी मुसहफ़ी
———————————————————–

शाहिद हसन ‘शाहिद’ साहब की तरही ग़ज़ल

दिल न टूटे तो प्यार कैसा है
तेरी आँखों का वार कैसा है

हसरते-दीद कम नहीं होती
तेरा दीदार, यार कैसा है

लाला-ओ-गुल से आपको मतलब
पूछते क्या हो ख़ार कैसा है

सारी दुनिया में कर दिया रुसवा
तू मिरा राज़दार कैसा है

आहो-ज़ारी तिरी नहीं सुनता
तेरा परवरदिगार कैसा है

कौन लौटा है जाके मुल्के-अदम
फिर तुझे इन्तिज़ार कैसा है

देख दुनिया को भी मगर ये देख
तेरा अपना शिआर कैसा है

ज़िन्दगी भर अदा नहीं होता
ज़िन्दगी का उधार कैसा है

देस परदेस हर जगह है साथ
तुझ से रिश्ता दयार कैसा है

देखना है अगर तो देख मुझे
हसरतों का मज़ार कैसा है

जब मिरा झूट, सच लगा उसको
फिर मिरे दिल पे बार कैसा है

पूछ कर और कर दिया बीमार
मेरा तीमारदार कैसा है

कैसा नादीदा ख़ौफ़ है ‘शाहिद’
तेरे दिल पर ये बार कैसा है

शाहिद हसन ‘शाहिद’ 09759698300

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22 comments on “T-26/10 दिल न टूटे तो प्यार कैसा है-शाहिद हसन ‘शाहिद’

  1. शहीद साहब आपका मद्धम-मीठा धीमा-धीमा लहजा हर बार कामयाब होता है। वाह वाह अच्छी ग़ज़ल के लिये दाद क़ुबूल फ़रमाइये

  2. Hasrat e deed kam nahi’n hoti
    tera deedaar yaar kaisa hai

    Waah shaahid hasan sahan bahut khoob

  3. ज़िन्दगी भर अदा नहीं होता
    ज़िन्दगी का उधार कैसा है

    देस परदेस हर जगह है साथ
    तुझ से रिश्ता दयार कैसा है
    क्या कहने..वाह शाहिद साहब बहुत खूब
    ढेरों दाद
    सादर
    पूजा

  4. acchi ghazal shahid sahab…. khaas taur se कौन लौटा है जाके मुल्के-अदम
    फिर तुझे इन्तिज़ार कैसा है ye she’r…daad qubulen

  5. Shahid sahab bohot achchi gazal huyi; khaas taur par yeh sher
    कौन लौटा है जाके मुल्के-अदम
    फिर तुझे इन्तिज़ार कैसा है

  6. हसरते-दीद कम नहीं होती
    तेरा दीदार, यार कैसा है

    लाला-ओ-गुल से आपको मतलब
    पूछते क्या हो ख़ार कैसा है

    bahut khoob Shahid sahab..Daad Qubule’n

  7. जनाब शाहिद हसन ‘शाहिद’ साहिब… बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।

  8. दिल न टूटे तो प्यार कैसा है
    तेरी आँखों का वार कैसा है

    हसरते-दीद कम नहीं होती
    तेरा दीदार, यार कैसा है

    लाला-ओ-गुल से आपको मतलब
    पूछते क्या हो ख़ार कैसा है

    बहुत अच्छी ग़ज़ल शाहिद साहब.
    बधाई.

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