25 टिप्पणियाँ

T-26/8 बोल दूँ जब झूठ, मुझको ठीक समझा जाए है-सूबे सिंह “सुजान”

हज़रते-मुसहफ़ी की ज़मीन जिसे तरह किया गया

ना-तवानी के सबब याँ किस से उट्ठा जाए हैं
आह उठने की कहें क्या दम ही बैठा जाए है

नज़अ में हर-चंद हम चाहें हैं दो बातें करें
क्या करें मुक़दूर कब है किस से बोला जाए है

आमदो-रफ़्त उन की याँ साअत-ब-साअत है वही
कब तबीबों का हमारे सर से बलवा जाए है

जा-ए-रिक़्क़त है मिरी हालत तो अब ऐ हमनशीं
पाँव क्या सीधे करूँ मैं दम ही उल्टा जाए है

तेग़-ए-अबरू तीरे-मिज़गाँ सब रखे हैं सान पर
इन दिनों उस की तरफ़ कब हम से देखा जाए है

ज़ख़्मे-दिल से मुझ को इक आती है बू-ए-उन्स सी
उस के कूचे की तरफ़ शायद ये रस्ता जाए है

‘मुसहफ़ी’ तू इश्क़ की वादी में आख़िर लुट गया
इस बयाबाँ में कोई नादान तन्हा जाए है

———————————————–

सूबे सिंह “सुजान” साहब की तरही ग़ज़ल

बोल दूँ जब झूठ, मुझको ठीक समझा जाए है
कह दिया सच, तो मुझे हैरत से देखा जाए है

अब अदालत लौट आ, अपनी पुरानी साख़ पर,
धीरे- धीरे बर्फ़ सा क़ानून ज़मता जाए है

हम न जाने, कौन, कितने हमसे बेहतर आएंगें,
वक़्त का दरिया गुजरना है, गुजरता जाए है

गालियाँ ही गालियाँ अब तो सियासत बन गई,
देश की जनता का अब विश्वास उठता जाए है

उनके आने की ख़बर सुनकर, मेरा ये हाल है,
दिल उड़ानों में है, लेकिन पाँव ठहरा जाए है

आपको अब भूलने की कोशिशें करने लगा,
धीरे-धीरे मेरे दिल का ज़ख़्म भरता जाए है

ये अदा भी ख़ास होती है महब्बत की “सुजान”
देखकर हर बार उनको दर्द बढ़ता जाए है

सूबे सिंह “सुजान” 09416334841

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25 comments on “T-26/8 बोल दूँ जब झूठ, मुझको ठीक समझा जाए है-सूबे सिंह “सुजान”

  1. उनके आने की ख़बर सुनकर, मेरा ये हाल है,
    दिल उड़ानों में है, लेकिन पाँव ठहरा जाए है

    आपको अब भूलने की कोशिशें करने लगा,
    धीरे-धीरे मेरे दिल का ज़ख़्म भरता जाए है

    ये अदा भी ख़ास होती है महब्बत की “सुजान”
    देखकर हर बार उनको दर्द बढ़ता जाए हैkya baat suzaan saaheb

  2. सुजान साहब उम्दा ग़ज़ल वाह वाह दाद क़ुबूल फ़रमाइये

  3. waaah sujan saheb!!!

    uske aane ki khabar sunkar………
    is sher par alag se daaaad..

    waaah!!

  4. उनके आने की ख़बर सुनकर, मेरा ये हाल है,
    दिल उड़ानों में है, लेकिन पाँव ठहरा जाए है
    आपको अब भूलने की कोशिशें करने लगा,
    धीरे-धीरे मेरे दिल का ज़ख़्म भरता जाए है
    ये अदा भी ख़ास होती है महब्बत की “सुजान”
    देखकर हर बार उनको दर्द बढ़ता जाए ह
    वाह वाह सुजान साहेब बधाई हो बहुत खूब

  5. Sujan Sahab khoobsurat gazal huyi hai aur khaas taur par yeh sher:-
    अब अदालत लौट आ, अपनी पुरानी साख़ पर,
    धीरे- धीरे बर्फ़ सा क़ानून ज़मता जाए है

    Khoob daad kubul farmayein!!

  6. जनाब सूबे सिंह “सुजान” साहिब… क्या शानदार मुरस्सा ग़ज़ल कही है आपने शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें।

  7. नके आने की ख़बर सुनकर, मेरा ये हाल है,
    दिल उड़ानों में है, लेकिन पाँव ठहरा जाए है

    आपको अब भूलने की कोशिशें करने लगा,
    धीरे-धीरे मेरे दिल का ज़ख़्म भरता जाए है

    Waah Sujaan sahab achhi gazal hui hae.
    Badhayi
    Sadar
    Pooja

  8. उनके आने की ख़बर सुनकर, मेरा ये हाल है,
    दिल उड़ानों में है, लेकिन पाँव ठहरा जाए है

    एक अच्छे ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद 🙂

  9. अच्छी ग़ज़ल हुई है सुजान साहब ..दाद
    -कान्हा

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