17 टिप्पणियाँ

T-26/7 मेरे दिल में दश्त पैदा कर दिया-दिनेश नायडू

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिस ज़मीन को तरह किया गया

रो के इन आँखों ने दरिया कर दिया
अब्र को पानी से पतला कर दिया

हुस्न है इक फित्नागर उसने वहीं
जिसको चाहा उसको रुस्वा कर दिया

तुम ने कुछ साक़ी की कल देखी अदा
मुझको साग़र मय का छलका कर दिया

बैठे बैठे फिर गयीं आँखें मेरी
मुझको इन आँखों ने ये क्या कर दिया

उसने जब मुझपे चलाई तेग़ हाय
क्यों मैं अपना हाथ ऊँचा कर दिया

‘मुसहफ़ी’ के देख यूँ चेहरे का रंग
इश्क़ ने क्या उसका नक्शा कर दिया

—————————-

दिनेश नायडू साहब की तरही ग़ज़ल

मेरे दिल में दश्त पैदा कर दिया
उसकी यादों ने भी क्या क्या कर दिया

मुझपे हावी हो गया गहरा सुकूत
इक सदा ने काम अपना कर दिया

इस तरह और टूट कर रोता रहूँ ?
किसकी दस्तक ने मुझे वा कर दिया

वो भी उलझे रह गए घर-बार में
हमने भी सहरा को सहरा कर दिया

चीख़ उट्ठी शहर की वीरानियाँ
आह ने मेरी छनाका कर दिया

अब सराबों की तरफ़ जाएंगे हम
हमको दरियाओं ने प्यासा कर दिया

ये हुआ इक गहरी काली शब के बाद
धूप ने हर ओर साया कर दिया

बर्फ मुझमें ज़ोरों की पड़ने लगी
फिर तेरी यादों ने कुहरा कर दिया

क्या हुआ, वो शक्ल क्या देखी गयी ?
रौशनी ने मुझको अंधा कर दिया

खुद ब खुद ही ज़ख्म भर जाता मेरा
इस रफ़ू ने ज़ख़्म गहरा कर दिया

अब हवाएं तय करें क्या हो मिरा ?
मैंने अपना ख़ाक उड़ाना कर दिया

दिनेश नायडू 09303985412

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17 comments on “T-26/7 मेरे दिल में दश्त पैदा कर दिया-दिनेश नायडू

  1. दिनेश मेरी जान क्या बला के शेर कहे हैं। भरपूर पुरअसर ज़हन में जम जाने वाले वाह वाह। अच्छी ग़ज़ल के लिए हज़ारों दाद

  2. Dinesh Naidu sahab
    MUJH PE HAAWI HOGAYA MERA SUKOOT………. KYA KAHNE JANAAB , Baaqi sabhi sher bhi khoob Daad qabool kare’n. .. Shafique Raipuri

  3. zindabaad dinesh ..poori ghazal umda…ravaan davaan hui hai… kya kahne… dher saari daad

  4. kya baat hai dineah sahab… Wah bahot achchi ghazal… Khususan ye sher…
    खुद ब खुद ही ज़ख्म भर जाता मेरा
    इस रफ़ू ने ज़ख़्म गहरा कर दिया

  5. Naidu Sahab behtareen gazal aur yeh sher khaas
    खुद ब खुद ही ज़ख्म भर जाता मेरा
    इस रफ़ू ने ज़ख़्म गहरा कर दिया

  6. Waaaaah waaaaaaah waaaaaaah, har sher par besaakhta waah nikli hai, bahot khoob

  7. जनाब दिनेश नायडू साहिब… वाह वाह वाह बहुत ख़ूब क्या ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें

  8. Waah Dinesh ji kya umda gazal kahi hae aapne
    Dili daad qubulein
    Sadar
    Pooja

  9. वो भी उलझे रह गए घर-बार में
    हमने भी सहरा को सहरा कर दिया

    चीख़ उट्ठी शहर की वीरानियाँ
    आह ने मेरी छनाका कर दिया

    अब सराबों की तरफ़ जाएंगे हम
    हमको दरियाओं ने प्यासा कर दिया

    यह शेर बहुत पसंद आए ।

  10. दिनेश नायडू जी वाह बहुत सुंदर ।

  11. वो भी उलझे रह गए घर-बार में
    हमने भी सहरा को सहरा कर दिया

    अब सराबों की तरफ़ जाएंगे हम
    हमको दरियाओं ने प्यासा कर दिया

    बर्फ मुझमें ज़ोरों की पड़ने लगी
    फिर तेरी यादों ने कुहरा कर दिया

    क्या उम्दा ग़ज़ल कही है दिनेश भैया ..वाह

  12. दिनेश भाई.
    इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिये मुबारक़.

    इन अशआर पर ख़ास तौर से दाद क़ुबूल करें.

    वो भी उलझे रह गए घर-बार में
    हमने भी सहरा को सहरा कर दिया

    अब सराबों की तरफ़ जाएंगे हम
    हमको दरियाओं ने प्यासा कर दिया

    बर्फ मुझमें ज़ोरों की पड़ने लगी
    फिर तेरी यादों ने कुहरा कर दिया (बर्फ़ का कॉपीराइट आपका ही है)

    खुद ब खुद ही ज़ख्म भर जाता मेरा
    इस रफ़ू ने ज़ख़्म गहरा कर दिया

    अब हवाएं तय करें क्या हो मिरा ?
    मैंने अपना ख़ाक उड़ाना कर दिया

  13. अब सराबों की तरफ़ जाएंगे हम
    हमको दरियाओं ने प्यासा कर दिया

    ये हुआ इक गहरी काली शब के बाद
    धूप ने हर ओर साया कर दिया

    बर्फ मुझमें ज़ोरों की पड़ने लगी
    फिर तेरी यादों ने कुहरा कर दिया

    क्या हुआ, वो शक्ल क्या देखी गयी ?
    रौशनी ने मुझको अंधा कर दिया

    खुद ब खुद ही ज़ख्म भर जाता मेरा
    इस रफ़ू ने ज़ख़्म गहरा कर दिया
    Bahut achi gazal hui bhaia
    dili daad hazir hai
    SAdar

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