28 टिप्पणियाँ

T-26/6 देखी गली न उसकी, कभी उसका दर न देखा-पूजा भाटिया

हज़रते-मुसहफ़ी की ग़ज़ल जिसे तरह किया गया

की आह हम ने लेकिन उस ने इधर न देखा
इस आह में तो हम ने कुछ भी असर न देखा

क्या क्या बहारें आईं क्या क्या दरख़्त फूले
नख़्ले-दुआ को लेकिन मैं बारवर न देखा

हरगिज़ हुआ न यारो वो शोख़ यार अपना
ज़ीं पेश वर्ना हम ने क्या क्या के कर न देखा

रहते हैं क्या शला वाँ आफ़तज़दे ही सारे
उस कूचे में किसी को आबाद घर न देखा

पहुँचा गली तक उस के आगे खड़ा रहा मैं
आगे क़दम के रखते फिर नामाबर न देखा

दो दो पहर तक उस के आगे खड़ा रहा मैं
पर उस ने ज़िद के मारे भर कर नज़र न देखा

क्या फायदा रखे है बस अब ज़ियादा मत रो
रोना तेरा किसी ने ऐ चश्मे-तर न देखा

कल यार की गली में ढूँढा जो ‘मुसहफ़ी’ को
इक लाश तो पड़ी थी पर उस का सर न देखा

———————————-

पूजा भाटिया की तरही ग़ज़ल

देखी गली न उसकी, कभी उसका दर न देखा
सब कुछ अबस है, उसको तूने अगर न देखा

वो साथ था तो मेरे क़दमों में मंज़िलें थी
पर उसके बाद मैं ने, वैसा सफ़र न देखा

मेमार के ही हाथों, टूटा था जो वो घर हूँ
अपनों के हाथ अपना, ज़ेरो-ज़बर न देखा

जिसको तमाम दुनिया में ढूंढती रही मैं
मुझमें ही रह रहा था, मैं ने मगर न देखा

कहने को उम्र कम है, हर सम्त है नज़ारे
इक उम्र में ही मैनें, क्या-क्या मगर न देखा

थी ख़ाक उसकी क़िस्मत, सो आया ख़ाक ले कर
था सामने गुहर पर, उसने उधर न देखा

नाराज़गी की शायद, थी इन्तिहाँ तभी तो
उसने इधर न देखा, मैंने उधर न देखा

पूजा भाटिया 08425848550

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28 comments on “T-26/6 देखी गली न उसकी, कभी उसका दर न देखा-पूजा भाटिया

  1. ज़बान पर चढ़ जाने वाला गुनगुनाने का मत्ला। वाह वाह

    देखी गली न उसकी, कभी उसका दर न देखा
    सब कुछ अबस है, उसको तूने अगर न देखा

  2. Jis ko tamaam. ………………. magar na dekha , waah waah bahut khoob Pooja Bhatiya sahiba.
    Shafique Raipuri

  3. बहुत खूब
    दाद हाज़िर है ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए

  4. प्रिय पूजा प्रीत

    उसके दर को तो यूँ कभी देखा नहीं

    तेरे लफ़्ज़ों में आज उसके दीद हो जाते हैं

  5. Puja Ji, bohot badhiya gazal huyi aur yeh sher khaas taur par
    मेमार के ही हाथों, टूटा था जो वो घर हूँ
    अपनों के हाथ अपना, ज़ेरो-ज़बर न देखा

    Daad kubul farmayein!!

  6. मोहतरमा पूजा भाटिया जी… वाह वाह बहुत ख़ूब…लाजवाब ग़ज़ल कही है आपने.. शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें

  7. सबसे पहले तो इतनी कठिन ज़मीन में ग़ज़ल कहने के हौसले को दाद

    और ऐसी ज़मीन में इतने अच्छे अच्छे शेर, वाह पूजा जी

    बहुत बहुत मुबारकबाद

  8. वो साथ था तो मेरे क़दमों में मंज़िलें थी
    पर उसके बाद मैं ने, वैसा सफ़र न देखा

    नाराज़गी की शायद, थी इन्तिहाँ तभी तो
    उसने इधर न देखा, मैंने उधर न देखा

    बेहद शानदार पूजा जी ..वाह

  9. बहुत अच्छी ग़ज़ल पूजा जी.
    मुबारक़.

  10. जिसको तमाम दुनिया में ढूंढती रही मैं
    मुझमें ही रह रहा था, मैं ने मगर न देखा

    कहने को उम्र कम है, हर सम्त है नज़ारे
    इक उम्र में ही मैनें, क्या-क्या मगर न देखा
    Bahut pyari gazal hui hai pooja ji
    dili daad qubul kijiye

  11. JISKO TAMAAM DUNIYA MEN DHONDTI RAHI MAIN
    MUJH MEN HI RAH RAHA THA, MAINE MAGAR N DEKHA.
    KYA HASEEN ASHAAR APNE KAHE HAI, POOJA JI, MUBARAKBAD QUBOOL FARMAYEN

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