17 Comments

किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो?-पूजा भाटिया

किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो?
तुम तो खुद से मुक़ाबले में हो

क़त्ल करना तो इसको ठीक नहीं
इश्क़ की मौत हादसे में हो

चाँद आएगा सुल्ह करने को ?
जाग जाओ, मुग़ालते में हो

जान दे डालोगे महब्बत में ?
तुम हो पागल कि फिर नशे में हो

आते-जाते हंसी फिसलती है
जैसे अश्कों के रास्ते में हो

चाँद ग़ायब है ,चाँद-रातों से
क्या पता मेरे आइने में हो?

तुम चले थे ख़ला को भरने तो अब
लौट आये कि रास्ते में हो ?

कौन मुंसिफ़ बने सिवा दरिया
इक जज़ीरा जो कटघरे में हो

-पूजा भाटिया

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17 comments on “किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो?-पूजा भाटिया

  1. किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो?
    तुम तो खुद से मुक़ाबले में हो

    क़त्ल करना तो इसको ठीक नहीं
    इश्क़ की मौत हादसे में हो

    चाँद आएगा सुल्ह करने को ?
    जाग जाओ, मुग़ालते में हो

    जान दे डालोगे महब्बत में ?
    तुम हो पागल कि फिर नशे में हो

    आते-जाते हंसी फिसलती है
    जैसे अश्कों के रास्ते में हो

    चाँद ग़ायब है ,चाँद-रातों से
    क्या पता मेरे आइने में हो?

    तुम चले थे ख़ला को भरने तो अब
    लौट आये कि रास्ते में हो ?

    कौन मुंसिफ़ बने सिवा दरिया
    इक जज़ीरा जो कटघरे में हो

    हर एक शेर लाजवाब पूजा जी कमाल की ग़ज़ल हुई है । बहुत बहुत मुबारकबाद । दुआ है ज़ोर-ए-क़लम यू ही बढ़ा करे।

  2. Ishq ki maut hadse meiN ho… kya kehne.. is khoobsurat ghazal ke liye dili mubarakbaad!!!

  3. किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो?
    तुम तो खुद से मुक़ाबले में हो

    क़त्ल करना तो इसको ठीक नहीं
    इश्क़ की मौत हादसे में हो

    चाँद आएगा सुल्ह करने को ?
    जाग जाओ, मुग़ालते में हो

    जान दे डालोगे महब्बत में ?
    तुम हो पागल कि फिर नशे में हो

    आते-जाते हंसी फिसलती है
    जैसे अश्कों के रास्ते में हो

    चाँद ग़ायब है ,चाँद-रातों से
    क्या पता मेरे आइने में हो?

    तुम चले थे ख़ला को भरने तो अब
    लौट आये कि रास्ते में हो ?

    कौन मुंसिफ़ बने सिवा दरिया
    इक जज़ीरा जो कटघरे में हो

    पूजा बेटा ज़िंदाबाद, बहुत अच्छी ग़ज़ल जीती रहिये बनी रहिये। जाने-तुफ़ैल स्वप्निल! बहुत बहुत मुबारक। यही वो मंज़िल है जहाँ उस्ताद शागिर्द को देखना चाहता है।

    • प्रणाम दादा
      आपका स्नेहिल आशीष बना रहे बस यही कामना है। बहुत
      शुक्रिया।
      सादर
      पूजा😇

  4. वाह… बहुत बढ़िया ग़ज़ल.

  5. bahut pyari Ghazal hai waahhhhhhhhh…..

    क़त्ल करना तो इसको ठीक नहीं
    इश्क़ की मौत हादसे में हो

    Lajawab lajawab

  6. क़त्ल करना तो इसको ठीक नहीं
    इश्क़ की मौत हादसे में हो

    आते-जाते हंसी फिसलती है
    जैसे अश्कों के रास्ते में हो

    Zindabad Pooja Ji…waah…is behtareen ghazal ke liye dheron daad kaboolen…

  7. umda ghazal…manzil to shayri me nahi milti, mere khayal se..lekin ek khoobsurat rasta qareeb hai… bahut mubarak

    • Pranaam dada
      Aapke shabd housala badhate hein. Sneh banaye rakhiyega.
      Aapke maargdarshan mein mujhe yakeen hae ki wo rasta jaroor milega.
      Dili shukriya.
      Sadar
      Pooja😇

  8. क़त्ल करना तो इसको ठीक नहीं
    इश्क़ की मौत हादसे में हो
    Wahhhhhhh Wahhhhhhh
    Pooja ji bahut achi gazal hui
    dili daad qubul kijiye
    Regards
    Imran

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