3 टिप्पणियाँ

इश्क़ का क़ायदा पढ़ा कीजे-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

इश्क़ का क़ायदा पढ़ा कीजे
रूह तक रौशनी किया कीजे

नाउमीदी तो कुफ़्र है, उनसे
मुस्कुराकर मिला-जुला कीजे

मेरे मुँह पे वो मेरी गायेगा
गुफ़्तगू आइने से क्या कीजे

वस्ल हो या कि हिज्र ऐ आँखों
दोनों मौसम में रतजगा कीजे

टकटकी बाँधे कबसे बैठा हूँ
कुछ मिरा भी हला-भला कीजे

आँच आये न आप पर कोई
आप ख़ामोश ही रहा कीजे

पीठ पीछे तो शेर हैं ही आप
रूबरू भी कहा सुना कीजे

ये भी इक तरह का तअल्लुक़ है
आप मुझसे ख़फ़ा हुआ कीजे

सूख जाए गला न ज़ख़्मों का
देर तक आप मत हँसा कीजे

इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’ 09818354784

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

3 comments on “इश्क़ का क़ायदा पढ़ा कीजे-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

  1. मेरे मुँह पे वो मेरी गायेगा
    गुफ़्तगू आइने से क्या कीजे

    Zindabaad…Zindabaad…Zindabaad…Irshad Bhai…Bejod Ghazal….waah

  2. Asslam alaikum dada
    मेरे मुँह पे वो मेरी गायेगा
    गुफ़्तगू आइने से क्या कीजे

    वस्ल हो या कि हिज्र ऐ आँखों
    दोनों मौसम में रतजगा कीजे
    BAHUT achi gazal
    Wahhhhhhh Wahhhhhhh
    Dili daad qubul kijiye
    sadar

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: