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T-25/31 उसकी जफ़ा को छोड़ वफ़ा में लगा रहा-पवनेंद्र ‘पवन’

उसकी जफ़ा को छोड़ वफ़ा में लगा रहा
मैं बस इसी गुनाहो-ख़ता में लगा रहा

मुझको मरज़ वो था ही नहीं अब पता चला
मैं जिसकी उम्र भर ही दवा में लगा रहा

रोने मैं अपना रोना गया जिसके दर वही
अपनी सुनाने रामकथा में लगा रहा

सावन की रात में जो नहीं सो सका कभी
तारे तलाशने में घटा में लगा रहा

हां, मैकदे में आ के भी प्‍यासा ही रह गया
साक़ी वो जो तुम्‍हारी अदा में लगा रहा

पवनेंद्र ‘पवन’ 09418252675

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2 comments on “T-25/31 उसकी जफ़ा को छोड़ वफ़ा में लगा रहा-पवनेंद्र ‘पवन’

  1. मुझको मरज़ वो था ही नहीं अब पता चला
    मैं जिसकी उम्र भर ही दवा में लगा रहा
    क्या कहने पवनेन्द्र जी

  2. रोने मैं अपना रोना गया जिसके दर वही
    अपनी सुनाने रामकथा में लगा रहा
    khuub

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