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T-25/24 दुनिया के हुस्न और अदा में लगा रहा-डॉ आज़म भोपाल

दुनिया के हुस्न और अदा में लगा रहा
इस तर्ह मैं भी मद्हे-ख़ुदा में लगा रहा

पढ़ कर नमाज़ काम पे सारे चले गए
नाकारः मैं ही कारे-दुआ में लगा रहा

कैसी क़बा थी इस पे तवज्जो ही कब हुई
मेरा तो ध्यान बंदे-क़बा में लगा रहा

जिस ने सभी के वास्ते मांगी दुआ-ए-ख़ैर
“मैं उसके साथ साथ दुआ में लगा रहा”

‘कहता’ नहीं है शेर ,वो ‘लिखता’ है शेर जो
मतरूक क्या है क्या है रवा में लगा रहा

बेटा हुआ शहीद तो तो घर का हर एक फर्द
‘आज़म’ हुसूले-खून बहा में लगा रहा

डॉ आज़म भोपाल 09827531331

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4 comments on “T-25/24 दुनिया के हुस्न और अदा में लगा रहा-डॉ आज़म भोपाल

  1. दुनिया के हुस्न और अदा में लगा रहा
    इस तर्ह मैं भी मद्हे-ख़ुदा में लगा रहा
    पढ़ कर नमाज़ काम पे सारे चले गए
    नाकारः मैं ही कारे-दुआ में लगा रहा
    कैसी क़बा थी इस पे तवज्जो ही कब हुई
    मेरा तो ध्यान बंदे-क़बा में लगा रहा वाह बहुत खुब ग़ज़ल सर क्या बात ह

  2. Bahut achi gazal hui sir
    dili daad qubul kijiye
    SAdar

  3. PADH KAR NAMAAZ KAAM PE SAARE CHALE GAYE
    NAKAARA MAI’N HI KAAR-E-DUAA ME’N LAGA RAHA…..
    WAAH DOCTOR AAZAM SAHAB KYA KAHNE MUBAARAKBAAD

  4. dr Azam saheb. umda ghazal k liye mubarakbad qubool farmayen

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