12 टिप्पणियाँ

T-25/19 पैबंदे-ज़ख़्म दिल की रिदा में लगा रहा-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

पैबंदे-ज़ख़्म दिल की रिदा में लगा रहा
मैं बदहवास हम्दो-सना में लगा रहा

जिसपर मिरे वजूद का दारोमदार
बुत वो तमाम उम्र ख़ुदा में लगा रहा

गिर गिर के लोग साहिबे-दस्तार हो गये
मैं ख़्वामख़्वाह अपनी अना में लगा रहा

मुझको यक़ीं था माँग रही होगी वो मुझे
‘मैं उसके साथ साथ दुआ में लगा रहा’

तस्वीरें कितनी बनती बिगड़ती चली गयीं
तादेर मेरा ध्यान ख़ला में लगा रहा

देखा कभी किसी ने भी अपने चराग़ को?
हाँ ऐब इक ज़रूर हवा में लगा रहा

पूरा मुआशरा था मरज़ की चपेट में
तन्हा हकीम मैं सो दवा में लगा रहा

आईं तो काम आईं मिरी बेवफ़ाइयाँ
कुछ रोज़ आदतन मैं वफ़ा में लगा रहा

अश्कों को कानो-कान भनक तक नहीं लगी
कल शब मैं किसके दस्ते-हिना में लगा रहा

मैंने कहा हटा दे मिरे क़िब्ला रुख़ से पाँव
वो बेवक़ूफ़ चारों दिशा में लगा रहा

इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’ 09818354784

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12 comments on “T-25/19 पैबंदे-ज़ख़्म दिल की रिदा में लगा रहा-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

  1. Irshad bhai, apki ghazal ki tareef nahin ki ja sakti. hamesha ki tarah umda ashaar par mushtamil ghazal hai. mubarakbad qubool farmayen

  2. पैबंदे-ज़ख़्म दिल की रिदा में लगा रहा
    मैं बदहवास हम्दो-सना में लगा रहा

    क्या अच्छा मंज़र खींचा है इरशाद भाई ….मतला बेहद हसीन है …वाह वाह

    जिसपर मिरे वजूद का दारोमदार था
    बुत वो तमाम उम्र ख़ुदा में लगा रहा

    अच्छा है…वाह वाह वाह …. क्या अच्छा शेर हुआ है ….

    गिर गिर के लोग साहिबे-दस्तार हो गये
    मैं ख़्वामख़्वाह अपनी अना में लगा रहा

    हाहा….मुझे ऐसा लग रहा है ये शेर मेरे बॉस के लिए कहा गया है ….

    मुझको यक़ीं था माँग रही होगी वो मुझे
    ‘मैं उसके साथ साथ दुआ में लगा रहा’

    क्या गिरह बाँधी है भैय्या ….वाह

    तस्वीरें कितनी बनती बिगड़ती चली गयीं
    तादेर मेरा ध्यान ख़ला में लगा रहा

    मेरे लिए हासिल-ए-ग़ज़ल ….अहा

    अश्कों को कानो-कान भनक तक नहीं लगी
    कल शब मैं किसके दस्ते-हिना में लगा रहा

    अहा हा हा हा हा हा ….वाह भाई वाह ….क्या कहने

    मैंने कहा हटा दे मिरे क़िब्ला रुख़ से पाँव
    वो बेवक़ूफ़ चारों दिशा में लगा रहा

    क्या ही अच्छी ग़ज़ल कही है इरशाद भाई ….क्या क्या काफ़िये बांधे है ….क्या क्या जाविये निकाले हैं …. वाह वाह वाह

    आपका

  3. गिर गिर के लोग साहिबे——-झूटी अना में लगा रहा वाह वाह क्या खूब कहा है, गिरह भी ख़ूब लगी है, मुबारकबाद

  4. Asslam alaikum daada
    गिर गिर के लोग साहिबे-दस्तार हो गये
    मैं ख़्वामख़्वाह अपनी अना में लगा रहा

    मुझको यक़ीं था माँग रही होगी वो मुझे
    ‘मैं उसके साथ साथ दुआ में लगा रहा’
    wahhh wahhhh
    Bahut achi gazal hai
    dili daad hazir hai
    Regars
    Imran

  5. मैंने कहा हटा दे मिरे क़िब्ला रुख़ से पाँव
    वो बेवक़ूफ़ चारों दिशा में लगा रहा
    kya baat h waah irshaad ji

  6. तस्वीरें कितनी बनती बिगड़ती चली गयीं
    तादेर मेरा ध्यान ख़ला में लगा रहा

    आईं तो काम आईं मिरी बेवफ़ाइयाँ
    कुछ रोज़ आदतन मैं वफ़ा में लगा रहा

    क्या कहने इरशाद भाई !!
    बहुत ख़ूब !
    दिली दाद क़ुबूल कीजिये.

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