11 Comments

T-25/17 अल्लाह की मैं हम्दो-सना में लगा रहा-फ़ज़्ल अब्बास सैफ़ी

अल्लाह की मैं हम्दो-सना में लगा रहा
शैतान था कि आहो-बुका में लगा रहा

कोई जफ़ा में कोई वफ़ा में लगा रहा
हर शख़्स अपनी-अपनी अदा में लगा रहा

रब पर मिरा यक़ीन था मुश्किल के वक़्त भी
मैं हर क़दम पे उसकी रज़ा में लगा रहा

साबित हुआ ख़ताओं का पुतला है आदमी
तौबा भी करके जुर्मो-ख़ता में लगा रहा

ले लेता काश पहले ही तदबीर से मैं काम
बेकार ही मैं आहो-बुका में लगा रहा

था उसके लाइलाज मरज़ का यही इलाज
‘मैं उसके साथ-साथ दुआ में लगा रहा’

‘सैफ़ी था बेक़ुसूर मगर उसके बाद भी
मुंसिफ़ भी जुस्तजू-ए-सजा में लगा रहा

फ़ज़्ल अब्बास सैफ़ी 09826134249

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

11 comments on “T-25/17 अल्लाह की मैं हम्दो-सना में लगा रहा-फ़ज़्ल अब्बास सैफ़ी

  1. सैफ़ी साहब …बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने आपने वाह वाह ….बहुत मुबारकबाद

  2. Achhi gazal hui hae saifi sahab
    Dheron daad
    Sadar
    Pooja

  3. बहुत अच्छी ग़ज़ल सैफ़ी साहब !
    मुबारक़ !

  4. umda ghazal…seedhi sacchchi bateN…kya kahne..wahhh

  5. अल्लाह की मैं हम्दो-सना में लगा रहा
    शैतान था कि आहो-बुका में लगा रहा
    सूली पर भी चढ जायें लेकिन मोमिन कभी फरियाद नहीं करते !! समग्र स्वीकृति ही सच्ची आस्तिक श्रद्धा है !! येही मर्कज़े ख्याल है इस मतले का बहुत खूब नया ख्याल और अल्फाज़ ने बाँधा भी खूब !!
    कोई जफ़ा में कोई वफ़ा में लगा रहा
    हर शख़्स अपनी-अपनी अदा में लगा रहा
    मेरे जेहन में एक सवाल अक़्सर आता है कि जब उसकी मर्ज़ी के बगैर कुछ हो ही नहीं सकता तो इतने काफिर कहाँ से आये !!! सच ये ही है कि सब अपना अपना किरदार निभाने आते हैं और किरदार सिरिश्त में पिन्हा रहता है –इसे DNA भी कह सकते है – सैफी साहब इसी बात को शेर मे कह रहे हैं कोई ज़फा मे कोई …..
    रब पर मिरा यक़ीन था मुश्किल के वक़्त भी
    मैं हर क़दम पे उसकी रज़ा में लगा रहा
    मालिक आपको मुबरकबाद और मैं अहसासे कमतरी से भारत रहा हूँ क्योंकि मेरा अक़ीदा ज़रूरत के हिसाब से बदल जाता है –पैसे के लिये लक्ष्मी माँ को और बल के लिये हनुमान जी को पूजता हूँ –लेकिन अपने इम्प्लायर को इनसे भी ज़ियादा आदर देता हूँ !!!
    साबित हुआ ख़ताओं का पुतला है आदमी
    तौबा भी करके जुर्मो-ख़ता में लगा रहा
    कोई शक नहीं !!! आदमी गुनाह नहीं करेगा तो ऊपर जा कर बख़्शवायेगा क्या??!!
    ले लेता काश पहले ही तदबीर से मैं काम
    बेकार ही मैं आहो-बुका में लगा रहा
    ठोस बात कह दी!! तदबीर पर तो पूरी गीता ही है !! कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन .. और अशोच्यानव्शोचस्त्वं प्र्ज्ञावादांश्चभाषते …. ठीक यही बाते जो शेर मे कही गईं .
    था उसके लाइलाज मरज़ का यही इलाज
    ‘मैं उसके साथ-साथ दुआ में लगा रहा’
    आखिरी रास्ता दुआ ही है हिन्दी फिल्मो मे डाक्टर को आज तक दो ही दयलाग दिये गये .. माता जी ये तो मेरा फर्ज़ था & अब सिर्फ दुआ कीजिये !!!
    ‘सैफ़ी था बेक़ुसूर मगर उसके बाद भी
    मुंसिफ़ भी जुस्तजू-ए-सजा में लगा रहा
    वर्ना मुंसिफ़ खुद को साबित कैसे करेगा !! भेडिये और मेमेने मे भेडिया नैसर्गिक मुंसिफ होता है और उसे जुस्तजू ए सजा की तालीम कुदरत से मिली होती है !!!
    फ़ज़्ल अब्बास सैफ़ी साहब !!! अच्छे शेर कहे और सच्चे शेर कहे !!! बहुत बहुत बधाई आपको इस गज़ल के लिये –मयंक

  6. achchi ghazal… daad qubul keejiye saifi sahab

  7. Wahhhhhhh wahhhhhhh
    bahut achi gazal hui sir
    dili daad qubul kijiye
    Sadar

  8. FAZL ABBAS BHAI, BAHUT UMDAH ASHAAR HUE HAIN. GIRAH KA SHEIR BHI KHOOB HAI. MUBARAKBAAD QUBOOL FARMAYEN.

  9. मतला ता मक़ता बेहतरीन ग़ज़ल के लिये मुबारकबाद पेश करता हूँ सैफी साहब, गिरह भी ख़ूब लगी है वाह।

  10. साबित हुआ ख़ताओं का पुतला है आदमी
    तौबा भी करके जुर्मो-ख़ता में लगा रहा
    nice

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: