10 टिप्पणियाँ

T-25/10 अपना तो ध्यान अपने पिया में लगा रहा-चंद्रभान भारद्वाज

अपना तो ध्यान अपने पिया में लगा रहा
बस नेकी और राहे-वफ़ा में लगा रहा

भगवान उसको माफ़ करे दीन जानकर
जो हर कदम गुनाहो-दगा में लगा रहा

वह ज़िंदगी से मेरी गया तोड़ सिलसिला
पर मैं तो अपने वादे-वफ़ा में लगा रहा

जब नाव उसकी जा के फँसी बीच धार में
‘मैं उसके साथ साथ दुआ में लगा रहा’

मधुमेह रक्तचाप के झंझट से बच गया
मैं सुब्हो-शाम योग-क्रिया में लगा रहा

पद से तो कार्यमुक्त किया उम्र ने मुझे
पर मैं ग़ज़ल की रम्य विधा में लगा रहा

मुझ को न कोई ज्ञान है गीता क़ुरान का
मैं ज़िंदगी की रामकथा में लगा रहा

अँग्रेज़ी दवा ने किया कोई न जब असर
दादी की दी घरेलू दवा में लगा रहा

आँखों से ‘भरद्वाज’ मिली आँख तो मगर
मेरा वजूद शर्मो-हया में लगा रहा

चंद्रभान भारद्वाज

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10 comments on “T-25/10 अपना तो ध्यान अपने पिया में लगा रहा-चंद्रभान भारद्वाज

  1. waah chandra bhaan ji lazwaab ghazal
    अपना तो ध्यान अपने पिया में लगा रहा
    बस नेकी और राहे-वफ़ा में लगा रहा

    yog kriya me lga rha wah
    रम्य विद्या में लग रहावबधाई हो

  2. आदरणीय भारद्वाज जी,
    इतने अलग रंगों से सजी आपकी ग़ज़ल के लिए आभार। वाकई बहुत अलग रंग है।
    सादर
    नवनीत

  3. इस गज़ल में गुरुकुल काँगडी – पतंजलि योगपीठ और शांतिकुंज की झलक मिलती है !! ये भी एक मुख्तलिफ तर्बीयत है और दाद की खासी हकदार है !! जब गज़ल के हवाले से नात और सेहरा कहे जा सकते हैं तो ये रहगुज़र क्यों नहीं तलाश की जा सकती !!! आपके नितांत नये अन्दाज़ और इज़हार के लिये आपको बधाई !!! शेर सीधे सादे और बेगुनाह हैं इसके लिये भी दाद !!! अगर ऐसी गज़लें ट्रेण्ड सेटर हो सकीं तो यकीनन एक बेहद बडा पाठकवर्ग गज़ल विधा से ज़रूर जुडेगा !! मैं मुश्ताक और मुंतज़िर ही नहीं दुआगो भी रहूँ गा इसके लिये !! भारद्वाज साहब आप सबसे जुदा है अपनी कहन में!! ईशवर करें आपका अन्दाज़ और कहन और गहरी हो और खूब परवान चढे – सादर –मयंक

  4. भारद्वाज जी
    निराले रंग में रंगी आप की ग़ज़ल ख़ूब है।
    ढेरों बधाई
    सादर
    पूजा

  5. aankhon se ‘BHARDWAJ’ mili aankh to magar + mera vujood sharmo haya men laga raha. Wah Bhardwaj saheb, Wah. khoob ghazal hui hai

  6. मधुमेह रक्तचाप के झंझट से बच गया
    मैं सुब्हो-शाम योग-क्रिया में लगा रहा

    पद से तो कार्यमुक्त किया उम्र ने मुझे
    पर मैं ग़ज़ल की रम्य विधा में लगा रहा

    चंद्रभान जी…

    आपका एक मुन्फ़रिद लहजा है ग़ज़ल कहने का..
    अच्छी ग़ज़ल के लिये मुबारक़ !

  7. Behtareen gazal ke liye, Bhardwaj ji…Badhai!

  8. भगवान उसको माफ़ करे दीन जानकर
    जो हर कदम गुनाहो-दगा में लगा रहा
    khuub

    पद से तो कार्यमुक्त किया उम्र ने मुझे
    पर मैं ग़ज़ल की रम्य विधा में लगा रहा
    kyaa kahne

  9. मुझ को न कोई ज्ञान है गीता क़ुरान का
    मैं ज़िंदगी की रामकथा में लगा रहा

    बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है साहब. दाद कुबूल कीजिए

    • भाई मयंक अवस्थी जी, शाहिद हसन जी ,बकुल देव जी, फज़ल अब्बास सैफी, आतिश इंदौरी और
      दिनेश नायडू जी, आपने मेरी ग़ज़ल पर जो टिप्पणियाँ की हैं उसके लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ।
      आपकी टिप्पणियां मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित करती रहतीं हैं पुनः ह्रदय से धन्यवाद।

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