18 Comments

T-25/3 मैं एहतियाते-हुस्ने-ख़ला में लगा रहा – नवीन

मैं एहतियाते-हुस्ने-ख़ला में लगा रहा।
इनसान हूँ सो कारे-वफ़ा में लगा रहा॥

ये काम करना सब से ज़ुरूरी था इसलिये।
मैं लमहा-लमहा फ़िक्रे-फ़ज़ा में लगा रहा॥

ख़ामोशियों से डर के तमाम उम्र साहिबान।
मैं कारोबारे-सिन्फ़े-नवा में लगा रहा॥

नवीन सी. चतुर्वेदी
+919967024593

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About Navin C. Chaturvedi

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18 comments on “T-25/3 मैं एहतियाते-हुस्ने-ख़ला में लगा रहा – नवीन

  1. kya kehne janaab, bahot khoob

  2. Naveen ji, bohot hi achchi gazal!!

  3. आदरणीय भैया,
    तीन अश्‍आर में ही नवीनता दिखा दी आपने। कम कहा लेकिन क्‍या ख़ूब कहा।
    बहुत खूब।
    सादर
    नवनीत

    • बहुत बहुत शुक्रिया नवनीत। आप लोगों को पढ कर कुछ कहने की हिम्मत आ जाती है बस। ख़ुश रहिये भाई।

  4. naveen ji waaah waah kya baat h

  5. choti magar pyari gazal
    Nawinji bahot khoob
    saify Raipur

  6. Naveen ji
    Pranaam
    Kahne ko aapne mahaz 3 sher kahe hein par bila shaq kamaal kahe hein .
    Dheron daad.
    Sadar
    Pooja

  7. sabhi sher manjhe huye hain aur kalfiyon ka intekhab kya kahene !! sach ye hai ki proper noun k kalfiye me lene se is zameen me kahana mushkil bhi hai -kafiya izafat ke saath behatar maani denge !!matle ke siva is sher par khaas daad !! —
    ये काम करना सब से ज़ुरूरी था इसलिये।
    मैं लमहा-लमहा फ़िक्रे-फ़ज़ा में लगा रहा॥
    aur sher kahiye navin bhai !! –mayank

    • मयंक भैया प्रणाम। दरअसल ये मिसरा मूड बना ही नहीं रहा था। यों समझ लो कि एक मिसरा भी न हो पा रहा था। फिर दादा की ग़ज़ल पढने को मिली। उसी रोज़ एक मतला और एक शेर हुये जिन्हें दादा तक पहुँचा दिया। मेरे निकट “में लगा रहा” समास क्रिया-वाचक कथ्यों के साथ अधिक फबती लग रहा था। प्रयास आप लोगों को पसन्द आया – आप सभी का बहुत-बहुत आभार। अगर कुछ और काम हो सका तो सादर करूँगा। प्रणाम।

  8. ये काम करना सब से ज़ुरूरी था इसलिये।
    मैं लमहा-लमहा फ़िक्रे-फ़ज़ा में लगा रहा..waah dada..kya kehne

  9. ये काम करना सब से ज़ुरूरी था इसलिये।
    मैं लमहा-लमहा फ़िक्रे-फ़ज़ा में लगा रहा

    क्या अच्छा शेर है वाह वाह , वाकई ये सबसे ज़रूरी काम है

  10. प्रणाम। इस बार का तरही मिसरा रदीफ़ के लिहाज़ से बहुत ही मुश्किल मिसरा है। दादा का आदेश था कि हाज़िरी ज़ुरूर लगे। मुझ से अब तक बस एक मतला और दो अशआर ही हो सके हैं।
    सादर।

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