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ग़ज़ल:- सुख़न के ख़ाली सदफ़ में गुहर नहीं आता-हाशिम रज़ा जलालपुरी

सुख़न के ख़ाली सदफ़ में गुहर नहीं आता
मैं चाहता तो बहुत हूँ मगर नहीं आता

कोई बताये मुझे दूसरा जहाँ है कहाँ
मुझे सितारों से आगे नज़र नहीं आता

मेरा नसीब है वनवास ज़िन्दगी भर का
सो मुझको याद कभी मेरा घर नहीं आता

मिरे गुनाह की मुझ को सज़ा यूँ मिलती है
दुआ तो करता हूँ लेकिन असर नहीं आता

मैं एक ऐसा मुसाफिर हूँ ऐ रज़ा हाशिम
कि जिसकी राह में इक भी शजर नहीं आता

हाशिम रज़ा जलालपुरी 09453422372

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3 comments on “ग़ज़ल:- सुख़न के ख़ाली सदफ़ में गुहर नहीं आता-हाशिम रज़ा जलालपुरी

  1. Bahut Achhi Ghazal Kahi Hashim Sahab..Bahut bahut mubaraqbaad 🙂

  2. वाह हाशिम साहब…उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद
    सादर
    पूजा

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