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ग़ज़ल:- अभी न आएगा जानां उतार पानी में-स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’

अभी न आएगा जानां उतार पानी में
घुला हुआ है तिरा इंतज़ार पानी में

अभी अभी ही नदी में उतार आया है
उतर रही है बतों की क़तार पानी में

नदी में हम ने भी इक बार जाल फेंका था
कोई करे न हमारा शिकार पानी में

ये बोट फ़त्ह भी कर पायेगी समंदर को ?
उड़ा रही है जो आबी ग़ुबार पानी में

पिघलती बर्फ़ है शायद पहाड़ का आंसू
उदास लगते हैं ये देवदार पानी में

मैं खींच लाता हूँ आँखों को अपनी ख़ुश्की पर
ये लौट जाती हैं पर बार बार पानी में

है आस-पास कहीं कश्तियों के सौदागर
कि डूबती है मिरी रहगुज़ार पानी में

नदी ही ला के किनारे पे अब उसे पटके
करेगा कौन भंवर का शिकार पानी में

सुकून झील पे इक लय में बह रहा है, ज्यूँ
बजा रही है ख़मोशी सितार पानी में

बदल रहे हैं बगूले मिरे भंवर में अब
कि डूबता है मिरा रेगज़ार पानी में

स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’ 08879464730

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7 comments on “ग़ज़ल:- अभी न आएगा जानां उतार पानी में-स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’

  1. पिघलती बर्फ़ है शायद पहाड़ का आंसू
    उदास लगते हैं ये देवदार पानी में

    बदल रहे हैं बगूले मिरे भंवर में अब
    कि डूबता है मिरा रेगज़ार पानी में

    एक और शानदार ग़ज़ल … एक औरr नया अनुभव !!!!

  2. Atish bhai, behtreen ghazal k liye mubarakbaad qubool farmayen. Wah.

  3. पिघलती बर्फ़ है शायद पहाड़ का आंसू
    उदास लगते हैं ये देवदार पानी में
    Waah waah

    मैं खींच लाता हूँ आँखों को अपनी ख़ुश्की पर
    ये लौट जाती हैं पर बार बार पानी में

    Aaye haye …zindabad

    बदल रहे हैं बगूले मिरे भंवर में अब
    कि डूबता है मिरा रेगज़ार पानी में

    kya kehne dada..behad umdaa ghazal..sadar pranam

  4. पिघलती बर्फ़ है शायद पहाड़ का आंसू
    उदास लगते हैं ये देवदार पानी में

    मैं खींच लाता हूँ आँखों को अपनी ख़ुश्की पर
    ये लौट जाती हैं पर बार बार पानी में

    Kya baat hae sir… bahut khoob…
    Behtareen gazal… ye do sher liye ja rahi huun..
    Sadar
    Pooja

  5. मैं खींच लाता हूँ आँखों को अपनी ख़ुश्की पर
    ये लौट जाती हैं पर बार बार पानी में …Ahaaa..kya kahne

    सुकून झील पे इक लय में बह रहा है, ज्यूँ
    बजा रही है ख़मोशी सितार पानी में..waahhh waahh

    ak aur nihayat khoobsoorat gazal ke liye dili mubarakbad bhaiya

    regrads

  6. मैं खींच लाता हूँ आँखों को अपनी ख़ुश्की पर
    ये लौट जाती हैं पर बार बार पानी में
    Wahhhhhhh wahhh dada
    dili daad qubul kijiye

    SAdar

  7. Wah wah wah swapnil saheb kya achchi ghazal utri hai…

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