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ग़ज़ल:- देवता हूं न ताज का पत्थर-नाज़िम नक़वी

देवता हूं न ताज का पत्थर
मैं हूं अपने मिज़ाज का पत्थर

जाने कब से ये रस्म जारी है
ढो रहे हैं रिवाज का पत्थर

याद है क्या कबीर कहता था
पूजिये काम-काज का पत्थर

रहनुमाई का है मरज़ सबमें
अब न ढूंढो इलाज का पत्थर

वो सियासत समझता है नाज़िम
कल चलाएगा आज का पत्थर

नाज़िम नक़वी 09811400468

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6 comments on “ग़ज़ल:- देवता हूं न ताज का पत्थर-नाज़िम नक़वी

  1. याद है क्या कबीर कहता था
    पूजिये काम-काज का पत्थर

    वाह बहुत खूब ग़ज़ल कही है श्रीमान बधाई ……………..

  2. bahut achchi ghazal hai. wah.

  3. Umda gazal hui hae Naqvi sahab
    Daad qubool karein
    Sadar
    Pooja

  4. जाने कब से ये रस्म जारी है
    ढो रहे हैं रिवाज का पत्थर
    बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई नक़वी साहब
    दिली दाद क़ुबूल कीजिये

  5. नाज़िम नक़वी साहब तमाम गाज़ल उम्दा है, बहुत बहुत मुबारक़बाद

  6. Nazim naqvi sahab…taamaam ghazal hi behad umda hai… zindabaad

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