5 Comments

ग़ज़ल:- पूछता कौन वफ़ा से उसकी-दिनेश नायडू

पूछता कौन वफ़ा से उसकी
मर गए लोग बला से उसकी

देखो किस तौर संवर जाता है
मुझसा सहरा भी घटा से उसकी

यार हम ख़ाकबसर ख़ाकनशीं
इस फ़ज़ा में हैं हवा से उसकी

अब कोई सुब्ह जगायेगी क्या
हमको उठना है सदा से उसकी

लौट जायेगी बहार उसके साथ
सब्ज़ मौसम है फ़ज़ा से उसकी

ज़िक्र करते हैं कज़ा से उसका
हम जो जीते है दवा से उसकी

आसमाँ ख़ुद को समझता है बहुत
आमद अब होगी ख़ला से उसकी

भेजो खुशबू का ज़रा सा झोंका
इतना कह देना रिदा से उसकी

उसका इंकार हो जाँ दे देंगे
हम की ज़िंदा है रज़ा से उसकी

ज़ख्म के फूल खिले हैं तन में
लहलहाता हूँ हवा से उसकी

दिनेश नायडू 09303985412

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5 comments on “ग़ज़ल:- पूछता कौन वफ़ा से उसकी-दिनेश नायडू

  1. पूछता कौन वफ़ा से उसकी
    मर गए लोग बला से उसकी

    kya umda matla hai…

    यार हम ख़ाकबसर ख़ाकनशीं
    इस फ़ज़ा में हैं हवा से उसकी

    अब कोई सुब्ह जगायेगी क्या
    हमको उठना है सदा से उसकी

    ….kya kehne bhaiya..waah waah

  2. यार हम ख़ाकबसर ……
    वाह दिनेश साहब खूब अश्आर पिरोये हैं आपने अपनी ग़ज़ल में
    ढेरों मुबारकबाद
    सादर
    पूजा

  3. zindabad Dinesh…. speechless is what i am..

  4. Kua baat hai sineah saheb…

  5. यार हम ख़ाकबसर ख़ाकनशीं
    इस फ़ज़ा में हैं हवा से उसकी

    अब कोई सुब्ह जगायेगी क्या
    हमको उठना है सदा से उसकी

    ky khoob Dinesh bhai waahhh waahh

    ak aur achhii gazal

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