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ख़ामुशी के जो ये तराने हैं-पूजा भाटिया

ख़ामुशी के जो ये तराने हैं
वक़्त के साज़ पर बजाने हैं

बेरुख़ी है हमारा हमसाया
ग़म की दुनिया में हम पुराने हैं

इश्क़ की ओर इक क़दम केवल
उम्र भर के  सुकूँ  गँवाने हैं

तीरगी की हसीन बाँहों में
रौशनी के नए ठिकाने हैं

क़द में छोटा सहीह ग़म तेरा
पाँव गहरे इसे जमाने हैं

मैं उदासी खरीद लायी हूँ
सारे कमरे मुझे  सजाने हैं

तेरे आने से सब नया क्यूँ  है
जबकि मंज़र वही पुराने हैं

घूम आये तमाम दुनिया हम
ख़ाब लेकिन वही पुराने हैं

जुग्नूओ ! अज़्म याद है अपना ?
चाँद हर सिम्त कब उगाने हैं ?

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16 comments on “ख़ामुशी के जो ये तराने हैं-पूजा भाटिया

  1. पूरी ग़ज़ल उम्दा है। लेकिन मैं उदासी ख़रीद लाइ हूँ. का जवाब नहीं… वाह

    • आपका आशीर्वाद है दादा
      आपने ग़ज़ल के लिए कुछ कहा तो लगा की कुछ लिख पायी हूँ।
      😇बहुत शुक्रिया
      सादर
      पूजा

  2. Wah pooja kya khoob kaha hai..
    इश्क़ की ओर इक क़दम केवल
    उम्र भर के सुकूँ गँवाने हैं

    Bas wah wah wah…hi kah sakte h

  3. wah wah wah… Pooja sahiba kya achche ashaar apne daaman mein liye baithi hai ye ghazal…

    • नक़वी साहब
      आपका बहुत शुक्रिया।
      स्नेह बनाये रखें।
      सादर
      पूजा

  4. मैं उदासी खरीद लायी हूँ
    सारे कमरे मुझे सजाने हैं

    Aesa sher kehne men kabhi poori umr lag jaati hai…waah…jiyo pooja dheron daad is khoobsurat ghazal ke liye…

    neeraj

    • आपका आशीर्वाद है नीरज जी।
      स्नेह बनाये रखियेगा।
      सादर
      पूजा

  5. पूजा जी आपकी शायरी बहुत संतुलित अौर ठहरी हुई है, ऐसे शेर मुझे बेहद पसंद आते हैं जो धीरे धीरे मंज़र पर हावी होते हैं, आपकी शायरी में वही ज़ौक़ है,

    तेरे आने से सब नया क्यूँ है
    जबकि मंज़र वही पुराने हैं

    घूम आये तमाम दुनिया हम
    ख़ाब लेकिन वही पुराने हैं

    बहुत मुबारक़बाद

  6. तीरगी की हसीन बाँहों में
    रौशनी के नए ठिकाने हैं

    मैं उदासी खरीद लायी हूँ
    सारे कमरे मुझे सजाने हैं Ahaa…kya khoob hai

    bahut khoobsoorat Gazal hui hai Pooja ji .

    sabhi ASH-aar khoob hain.

    dher sari daad

  7. मैं उदासी खरीद लायी हूँ
    सारे कमरे मुझे सजाने हैं

    तेरे आने से सब नया क्यूँ है
    जबकि मंज़र वही पुराने हैं

    घूम आये तमाम दुनिया हम
    ख़ाब लेकिन वही पुराने हैं

    Bahut achi gazal hui puja ji
    dili daad qubul kijiye

    Regards
    IMran

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