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ग़ज़ल:- न जाने कब हुआ ये आपका दिल-नाज़िम नक़वी

न जाने कब हुआ ये आपका दिल
अभी तक तो हमारे पास था दिल

चले आओ संवरने के बहाने
बना बैठा है कबसे आइना दिल

सबब कोई नहीं था ख़ास फिर भी
बड़ी मुद्दत तलक धड़का किया दिल

तमन्नाओं को धड़कन में बसाकर
कहां तक देखिये ले जायेगा दिल

सिमट आए जहां का दर्द जिसमें
कहां से लाओगे इतना बड़ा दिल

हमें है ‘मीर’ से सोहबत जहां पर
पयंबर दिल है क़िब्ला दिल ख़ुदा दिल

इसे बाज़ार मत ले जाओ ‘नाज़िम’
ये घर की तर्बियत का है पला दिल

नाज़िम नक़वी 09811422468

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8 comments on “ग़ज़ल:- न जाने कब हुआ ये आपका दिल-नाज़िम नक़वी

  1. नक़वी साहब खूब ग़ज़ल हुई है।
    ढेरों दाद

    सादर
    पूजा

  2. Bahut achhii gazal hui Nazim naqwi sahab

    dili daad qubool keejiye

  3. चले आओ संवरने के बहाने
    बना बैठा है कबसे आइना दिल

    Naazim sahab…. Kya khoobsurat ghazal kahi hai aapne… Dil khush ho gaya 🙂

  4. Bahut umda nazim naqvi sahab..dil jeet liya aapne… 🙂

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