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ग़ज़ल:- तूने क्या क्या ज़माने कुछ न किया-इरशाद ख़ान सिकंदर

तूने क्या क्या ज़माने कुछ न किया
आया नारा लगाने कुछ न किया

घर में रहते, गए ही क्यों थे गर ?
दश्त में भी दिवाने कुछ न किया

तीरगी ढक रही है मेरे ज़ख़्म
रौशनी बेहया ने कुछ न किया

इब्तिदा आपकी क़यामत थी
हैफ़-सद इन्तेहा ने कुछ न किया

आसुंओं ने ही की मसीहाई
मेरे हक़ में दुआ ने कुछ न किया

ज़ख़्म सब हैं हरे-भरे देखो
फिर न कहना ख़ुदा ने कुछ न किया

बेज़ुबानी को पढ़ लिया मैंने
यानी उसकी सदा ने कुछ न किया

ख़त्म मीयाद हो गई होगी
ग़ौर से सुन हवा ने कुछ न किया

तुम ही कहते हो घर रहा कीजे
तुम ही मारोगे ताने कुछ न किया

इरशाद ख़ान सिकंदर 09818354784

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5 comments on “ग़ज़ल:- तूने क्या क्या ज़माने कुछ न किया-इरशाद ख़ान सिकंदर

  1. तीरगी ढक रही है मेरे ज़ख़्म
    रौशनी बेहया ने कुछ न किया

    आसुंओं ने ही की मसीहाई
    मेरे हक़ में दुआ ने कुछ न किया

    zindabad dada..waah waah
    Sadar

  2. IRSHAD BHAI, GHAZAL K TAMAAM ASHAAR QABILE DAAD. YE SHER AAH……….

    ANSUON NE HI KI MASEEHAI
    MERE HAQ MEN DUA NE KUCHCH N KIYA.

    BAHUT KHOOB.

  3. तीरगी ढक रही है मेरे ज़ख़्म
    रौशनी बेहया ने कुछ न किया

    Kya achha sher hai Bhaiyya… Roshni Behaya ne kuch n kiya… Kya baat hai…

    ज़ख़्म सब हैं हरे-भरे देखो
    फिर न कहना ख़ुदा ने कुछ न किया

    Achha hai.. waah waah…

    बेज़ुबानी को पढ़ लिया मैंने
    यानी उसकी सदा ने कुछ न किया

    Aaay Haay…. waah waah waah… Kya achha sher hai bhaiyya

    आसुंओं ने ही की मसीहाई
    मेरे हक़ में दुआ ने कुछ न किया

    ख़त्म मीयाद हो गई होगी
    ग़ौर से सुन हवा ने कुछ न किया

    तुम ही कहते हो घर रहा कीजे
    तुम ही मारोगे ताने कुछ न किया

    Kya kahun… Kya kaha jaaye… Beintaha Khoobsurat ghazal hui hai bade bhai… Hatss off….

  4. तीरगी ढक रही है मेरे ज़ख़्म
    रौशनी बेहया ने कुछ न किया

    आसुंओं ने ही की मसीहाई
    मेरे हक़ में दुआ ने कुछ न किया

    Bharpoor gazal hui hai dada ..sabhi sher pur-asar hain

    dheron daad

    regards

  5. घर में रहते, गए ही क्यों थे गर ?
    दश्त में भी दिवाने कुछ न किया

    तीरगी ढक रही है मेरे ज़ख़्म
    रौशनी बेहया ने कुछ न किया

    तुम ही कहते हो घर रहा कीजे
    तुम ही मारोगे ताने कुछ न किया
    Wahhhhhhh dada
    Bahut pyari gazal hai
    dili daad qubul kijiye
    sadar
    IMran

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