10 टिप्पणियाँ

ग़ज़ल:- बात इक पूछूं ए मेरे रब यार-नाज़िम नक़वी

बात इक पूछूं ए मेरे रब यार
क्यों नहीं लोग अब मुहज़ज़्ब यार

अब ये इंसान कौन गढता है
इतने बेढंगे इतने बेढब यार

अशरफ़ुल कहके सब चिढाते हैं
छीन लो मुझसे मेरा मन्सब यार

सब हैं काफ़िर बस इक तुम्हारे सिवा
अच्छा समझाओ इसका मतलब यार

हम हैं हिन्दोस्तान वाले हमें
अच्छा लगता है सबका मज़हब यार

रात-दिन इक तमाशा जारी है
तुमको आते हैं कितने करतब यार

इश्क़ की इंतिहा पे मीर का क़ौल
मर गये इब्तिदा ही में सब यार

नाज़िम नक़वी 09811400468

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10 comments on “ग़ज़ल:- बात इक पूछूं ए मेरे रब यार-नाज़िम नक़वी

  1. Bahut achhi Ghazal hai Nazim Naqvi sahab… Mubaraqbaad qubool farmaayein

  2. Kya hi acchi ghazal naqvi sahab….. bahut mubarak…

  3. रात-दिन इक तमाशा जारी है
    तुमको आते हैं कितने करतब यार

    Bahut khoob Nakvi sahab. Achhi gazal hui hae

    Dheron daad
    Sadar
    Pooja

  4. अब ये इंसान कौन गढता है
    इतने बेढंगे इतने बेढब यार

    सब हैं काफ़िर बस इक तुम्हारे सिवा
    अच्छा समझाओ इसका मतलब यार

    kya kahne naazim naqwi sahab
    bahut achhii gazal hui hai

    dher sari daad

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