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T-24/30 कहाँ रही है मिल्कियत हमारे इक़्तिदार की-नासिर अली नासिर

कहाँ रही है मिल्कियत हमारे इक़्तिदार की
कमीनगी तो देखिये मियां किरायेदार की

बड़ी ही आन-बान से बसीरतों के गुल खिले
न पूछ सरबलन्दियां हयाते-मुश्क़बार की

मिरी निगाहो-क़ल्ब में ग़ज़ब का अहतराम है
उतारूं क्यों न आरती शफ़ीक़ो-ग़मगुसार की

जहाँ की सख़्त गुफ़्तगू भुला दी कितने प्यार से
शगुफ़्तगी तो देखिये मिज़ाजे-बुर्दबार की

मिरे क़दम पे बिछ गयीं जहाँ की सुर्ख़रूइयां
ख़ुदा ने लाज ख़ुद रखी यक़ीनो-ऐतबार की

हरेक ज़ाविये से वो जहाँ में बेवक़ार हैं
जहाँ में हैसियत है क्या मियां ज़लीलो-ख़्वार की

ख़ुदा का शुक्र है मियां हयात बावक़ार है
हुनरवरी तो देखिये मिरे हुनर वक़ार की

वुजूद उसका आज भी मियां सुकूंनवाज़ है
हयात नासिर ऐसी है दरख़्ते-सायादार की

कमाल वाली हो गयी सुबुद्धि मेरे यार की
दमक रही है श्रेष्ठता विचार में विचार की

जगत के छल-प्रपंच ने प्रवीण उनको कर दिया
कहाँ मिलेगी आपको सुगंध ऐतबार की

ये कह रही है आपसे हमारी अंतरात्मा
पवित्र दिल में आज भी पवित्रता है प्यार की

जगत की सांठ-गांठ में ग़ज़ब की सांठ-गांठ है
लगी है होड़ किस क़दर जगत में इक़्तिदार की

यथार्थता के रंग से कला में रूह फंक दी
प्रवीणता तो देखिये प्रवीण चित्रकार की

गज़ब है मुझ ग़रीब को लताड़ता है हर कोई
प्रशंसनीय ज़ात है जगत में मालदार की

समय के अंतराल से विचित्र हाल हो गया
बुराइयों में ढल गयी विशिष्टता दयार की

कटोरा हाथ में दिया है ‘नासिर’ अपने भाग्य ने
लगा रहे हैं फेरियां नगर में द्वार-द्वार की

नासिर अली नासिर 09926502405

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2 comments on “T-24/30 कहाँ रही है मिल्कियत हमारे इक़्तिदार की-नासिर अली नासिर

  1. NASIR BHAI URDU AUR HINDI ZABAN MEN ITNI KHOOBSURAT GHAZAL KAHI HAI AAPNE KI KHADE HO KAR TALIYAN BAJA RAHA HOON. AAP KE IS HUNAR KI JITNI TAREEF KI JAAY KAM HAI…SUBHAN ALLAH…BEHTAREEN GHAZAL…MERI DILI DAAD KABOOLEN.

    NEERAJ

  2. bahut achhii gazal hui hai Nasir sahab
    dher saari daad

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