6 टिप्पणियाँ

T-24/26 महक रही हैं बाहें आज मेरे इंतज़ार की-बिमलेंदु कुमार

महक रही हैं बाहें आज मेरे इंतज़ार की
बयार तेरे तन की है या रुत है नौ-बहार की

तुम्हीं से बरक़रार है सुहाग चांदनी क यां
वगरना क्या है वज्ह शामे-हिज्र के ख़ुमार की

जली है रात यादों में सुलग सुलग के इस तरह
कि सुब्ह हो गई है नर्म राख सी सिगार की

गमों के रेगज़ार में सफर तो मुख़्तसर है अब
छुपा रखी है मैंने कुछ छुअन तिरी फुहार की

गई तमाम उम्र ये अदायगी में सूद की
समझ गया ये ज़िंदगी थी मेरी बस उधार की

मज़ाल क्या कि नूर का मैं उसके तर्ज़ुमा करूं
‘ये दास्तां है नज़र पे रौशनी के वार की’

जहां लगाये जाती हैं वफ़ा भी दांव पर वहां
बिसात क्या भला है मेरे जैसे बदक़िमार की

बिमलेंदु कुमार 09711381945

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6 comments on “T-24/26 महक रही हैं बाहें आज मेरे इंतज़ार की-बिमलेंदु कुमार

  1. तुम्हीं से बरक़रार है सुहाग चांदनी क यां
    वगरना क्या है वज्ह शामे-हिज्र के ख़ुमार की

    गमों के रेगज़ार में सफर तो मुख़्तसर है अब
    छुपा रखी है मैंने कुछ छुअन तिरी फुहार की

    मज़ाल क्या कि नूर का मैं उसके तर्ज़ुमा करूं
    ‘ये दास्तां है नज़र पे रौशनी के वार की’

    Is andaaz pe kaun n mar jaye Bimlendu…Jiyo…Behtareen ghazal bhai…waah…

  2. Waah behad umdaa ghazal ..girah bhi kya khoob hai..daad qubule’n

  3. महक रही हैं बाहें आज मेरे इंतज़ार की
    बयार तेरे तन की है या रुत है नौ-बहार की
    श्रंगार रस महक रहा है शेर मे कामयाबी के साथ !!! वाह !!
    तुम्हीं से बरक़रार है सुहाग चांदनी क यां
    वगरना क्या है वज्ह शामे-हिज्र के ख़ुमार की
    भाषा बढिया इस्तेमाल की है !!!! तुम्हीं से बरक़रार है सुहाग चांदनी क यां….
    गमों के रेगज़ार में सफर तो मुख़्तसर है अब
    छुपा रखी है मैंने कुछ छुअन तिरी फुहार की
    ये शेर भी अच्छा कहा है !!! तसाद बहुत खूब इस्तेमाल किया है !!
    गई तमाम उम्र ये अदायगी में सूद की
    समझ गया ये ज़िंदगी थी मेरी बस उधार की
    ये उन आँखों का सहरा कह रहा है
    कोई दरिया भी नीचे बह रहा है
    बदन को साँस की कीमत चुका कर
    किरायेदार घर में रह रहा है –मयंक
    मज़ाल क्या कि नूर का मैं उसके तर्ज़ुमा करूं
    ‘ये दास्तां है नज़र पे रौशनी के वार की’
    नये अन्दाज़ में गिरह और खूबसूरत कहा है !!!
    जहां लगाये जाती हैं वफ़ा भी दांव पर वहां
    बिसात क्या भला है मेरे जैसे बदक़िमार की
    अलमीया है ये हमारे समय का !!
    बिमलेंदु भाई बहुत बहुत मुबारकबाद !!! कामयाब गज़ल !!! –मयंक

  4. kya baat hai Bimal bhai ..bahut khoob…
    bharpoor gazal

    dher sari daad

  5. Wahhhhhh Wahhhhhh
    bimal bhai bahut achi gazal hui hai
    dili daad qubul kijiye

  6. Khoob girah lagayi hae Bimlendu ji.
    Umda gazal.
    Badhai
    Sadar
    Pooja

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