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T-24/17 इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की-आयुष ‘चराग़’

इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की
दिए की लौ में जल रही है रात इंतज़ार की

भटक रही है आसमाँ में आरज़ू की फ़ाख़्ता
ज़मीं पे ज़िन्दगी पड़ी है आग में बुख़ार की

मिरी वो मंज़िले न थीं जो मंज़िलें मुझे मिलीं
मिरी नहीं थी राह वो जो मैने इख़्तियार की

झुलस गए निगाह के तमाम ख़ाब आंच से
ये दास्तान है नज़र पे रोशनी के वार की

सुला रही है बीच राह में थकन हमें ‘चराग़’
जगा रही है जुस्तजू मगर तेरे दयार की

आयुष ‘चराग़’ 09953925743

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19 comments on “T-24/17 इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की-आयुष ‘चराग़’

  1. bahut khoob ghazal huyi hai…wahhh

  2. kya kahne Ayush ji ..umda gazal hui hai

    dher sari daad

  3. चराग़ साहब!
    एक से बढ़ कर एक शे’र कहे हैं आपने।
    वाह्ह वाह्ह वाह।

    बहुत खूब। बधाई

  4. चराग़ साहब को बहुत बधाई और बहुत अच्‍छी ग़ज़ल के लिए दाद।
    सादर
    नवनीत

  5. इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की
    दिए की लौ में जल रही है रात इंतज़ार की
    बहुत सुन्दर कहन है !! तस्वीर मोहक है !! रवाँ है बयान ! मतले पर दाद !!
    भटक रही है आसमाँ में आरज़ू की फ़ाख़्ता
    ज़मीं पे ज़िन्दगी पड़ी है आग में बुख़ार की
    सानी मिसरे की तर्तीब थोडी जटिल है लेकिन तश्बीह नई है और शेर सुन्दर कहा है !!
    मिरी वो मंज़िले न थीं जो मंज़िलें मुझे मिलीं
    मिरी नहीं थी राह वो जो मैने इख़्तियार की
    बेशतर लोगों का सच है ये !! कुछ किस्मत वालों के बयान जुदा हो सकते हैं !! –लेकिन बयान पधने वाले को फौरन हमारा आहंग करता है !!
    झुलस गए निगाह के तमाम ख़ाब आंच से
    ये दास्तान है नज़र पे रोशनी के वार की
    अच्छा कहा है !!
    सुला रही है बीच राह में थकन हमें ‘चराग़’
    जगा रही है जुस्तजू मगर तेरे दयार की
    बेशक !!
    जिनके होंठों पे हंसी पांओं मे छाले
    हाँ वही लोग तेरे चाहने वाले होंगे
    आयुष ‘चराग़’ भाई !! 5 खूबसूरत शेर कहने के लिये बधाई –मयंक

    • आपकी दाद तो मेरी ग़ज़ल से भी खूबसूरत होती है अवस्थी जी !!!
      बहुत बहुत शुक्रिया

  6. झुलस गए निगाह के तमाम ख़ाब आंच से
    ये दास्तान है नज़र पे रोशनी के वार की

    Subhan allah…behad khoobsurat ghazal…daad kaboolen..

  7. चराग साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, वाह वाह 🙂

  8. मिरी वो मंज़िले न थीं जो मंज़िलें मुझे मिलीं
    मिरी नहीं थी राह वो जो मैने इख़्तियार की

    झुलस गए निगाह के तमाम ख़ाब आंच से
    ये दास्तान है नज़र पे रोशनी के वार की

    waah bhai..khoob

  9. Charag sahaab kya hi umda gazal hui hae.waah waah. Dheron mubarkbad.
    Sadar
    Pooja

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