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T-24 मिसरा तरह :- ये दास्तान है नज़र पे रौशनी के वार की

साहिबो, मैं कल मनोज मित्तल ‘कैफ़’ साहब की गज़लें पोस्ट कर रहा था कि उनकी एक ज़मीन ने मेरा ध्यान ख़ास तौर पर अपनी और खींचा। हमने इस बह्र में अभ्यास भी नहीं किया है। तरही महफ़िल का मिसरा निकालने का समय भी आ गया है। इस बार उनके इस मिसरे को ही तरह तय किये लेते हैं। उनकी कही ग़ज़ल तहरीक भी देगी और उन्हें मज़ा भी देगी चूँकि तरह के उसूलों के मुताबिक़ उन्हें भी नई ग़ज़ल कहना पड़ेगी। ग़ज़लें पोस्ट करने की तारीख़ 10 जून रखते हैं और समापन 30 जून को करेंगे। पहली से दस अप्रैल तक इस 10 दिन के पीरियड में अन्य गज़लें पोस्ट होती रहेंगी मगर 10 के बाद 30 जून तक तरही की हलचल रहेगी.

मिसरा तरह :- ये दास्तान है नज़र पे रौशनी के वार की

तक़तीअ :- मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन 1 2 1 2 -1 2 1 2 -1 2 1 2 -1 2 1 2

क़ाफ़िये :- हज़ार, बहार, पुकार, संवार, निखार, सँवार, उभार, पार, ख़ार.………

आप सब अपनी गज़लें tufailchaturvedi@gmail.com पर भेजने की कृपा कीजियेगा

तुफ़ैल चतुर्वेदी

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One comment on “T-24 मिसरा तरह :- ये दास्तान है नज़र पे रौशनी के वार की

  1. तजल्लियों ने आदमी को सोचना सिखा दिया।
    ‘ये’ दासतान है नज़र पै रौशनी के वार की॥
    नवीन

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