5 टिप्पणियाँ

संसार में कोई भी हो सब को रवानी चाहिये

संसार में कोई भी हो सब को रवानी चाहिये
पानी को धरती चाहिये धरती को पानी चाहिये

इज़्ज़त कमानी चाहिये इज़्ज़त बचानी चाहिये
नज़रों में उठने के लिये नज़रें झुकानी चाहिये

हम चाहते थे आप हम से नफ़रतें करने लगें
सब कुछ भुलाने के लिए कुछ तो निशानी चाहिये

बेशक़ ये ऐसा बाग़ है जिस का कोई सानी नहीं
लेकिन हुज़ूर अब इस चमन को बाग़वानी चाहिये

उस पीर को परबत हुए काफ़ी ज़माना हो गया
उस पीर को अब नई-नवेली तर्जुमानी चाहिये

हम जीतने के ख़्वाब आँखों में सजायें किस तरह
लश्कर को राजा चाहिए राजा को रानी चाहिये

कुछ भी नहीं ऐसा कि जो उसने हमें बख़्शा नहीं
हाजिर है सब कुछ सामने बस बुद्धिमानी चाहिये

लाजिम है ढूँढें और फिर बरतें सलीक़े से उन्हें
हर लफ्ज़ को हर दौर में अपनी कहानी चाहिये

इस दौर के बच्चे नवाबों से ज़रा भी कम नहीं
इक पीकदानी इन के हाथों में थमानी चाहिये

हर बाप के दिल का यही अरमान होता है ‘नवीन’
ससुराल में भी उस की लाड़ो मुस्कुरानी चाहिये

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About Navin C. Chaturvedi

www.saahityam.org 09967024593 navincchaturvedi@gmail.com http://vensys.in

5 comments on “संसार में कोई भी हो सब को रवानी चाहिये

  1. मयंक जी इन सज्जन का नाम-नसब इस ही लिये पूछा था ताकि समझ सकें कि ये के जी के स्टूडेण्ट हैं या कोई अनुभवी डोक्टरेट या फिर कोई प्रायोजित-पप्पू। पता चलता तो इन्हें यथायोग्य एक्सप्लेनेशन भी देते।

    जिस लफ़्ज़ का जिक्र ये बार-बार कर रहे हैं उस लफ़्ज़ के सम्पादक यानि तुफ़ैल जी से विवेचित अशआर के बारे में पूछा तो दादा का कहना था कि इन्होंने ग़लती से अच्छे शेर कोट कर दिये हैं

    अब जैसे भी हुई हो भलाई हुई तो है

    नयी राह पर अकेले चलने का जोख़िम क्या होता है मुझे ब-ख़ूबी मालूम है। सचिन तेन्दुलकर, अमिताभ बच्चन बल्कि यहाँ तक कि राजा राम की भी आलोचना होती है तो अपनी तो औक़ात ही क्या। बस दो बातें अच्छी नहीं लगीं

    एक – छुप कर वार करने की बजाय खुल कर बात करना चाहिये थी
    दूसरी – पोर्टल के सदस्यों की ख़ामुशी

    अनाम जी

    अपनी हद पर ही कमोबेश कदम रखते हैं।
    हम समन्दर हैं – किनारों का भरम रखते हैं॥

    आप तर्क के साथ खुल कर आइये, आप का स्वागत है

    सादर
    नवीन

  2. ऐसे शेर ग़ज़ल की खूबसूरती पर मज़ाक है ,

    लफ्ज़ जैसे पोर्टल पर इस तरह की ग़ज़लें छपती देखना बड़ा दुखद है

    • अनाम जी आप कोई भी हों –लेकिन एक बात तय है कि आप इस पोर्टल पर व्यवधान उत्पन्न करने के लिये या नवीन से अपनी निजी खुन्नस निकाने के लिये कमेण्ट लिख रहे हैं !! नवीन के बीसों अशआर की हर जगह मुक्त कण्ठ से प्रशंसा हुई है –लेकिन शायद आप इनसे व्यक्तिगत विद्वेष रखते हैं !!! इसमे कोई दो राय नहीं कि आप नवीन से परिचित भी हैं वगर्ना आप अनाम नहीं रहते अपना परिचय अवश्य देते!! कमीगाह में छिप कर किसी पर वार करना कायरता है !! आपने खुद को छुपा कर अपना परिचय यही दिया है कि आपमें साहस नहीं है और जिसमें साहस नहीं होता वो अप्रतिबद्ध सत्य नहीं कह सकता !! प्रतिबद्ध सत्य सच नहीं होता!! आप कुछ भी कहना चाहते हैं तो अपना परिचय दीजिये !! हम आपको वाजिब सम्मान देंगे और आपके सभी तर्क अगर कसौटी पर सही हैं तो स्वीकार भी किये जायेंगे!! –मयंक

  3. Naveen ji matle se jo sama bandha hai use makte tak bahut khoobsurati se nibha le gaye hain aap… Behtareen ghazal hui hai… Naya rang nayi soch waah waah waah … Jiyo Bhai

    Neeraj

  4. अनाम साहब, आपको या किसी को भी किसी भी शायर के कलाम या उसको नापसंद करने हक़ है मगर इस पोर्टल से जुड़े होने के कारण हस्तक्षेप करना मेरी मजबूरी है। हम लोगों की पॉलिसी है कि हम यहाँ पर किसी तरह के विवाद से बचते हैं। इस के कारण मुझे अनेकों मित्रों की नाराज़गी भी झेलनी पड़ी मगर हम इस पॉलिसी पर क़ायम रहे। शुरू से ऐसा नहीं था मगर समय ने सिखाया कि शांत भाव से धीरे-धीरे चलो तो सफर खुशगवार रहता है। आप सब फ़ेस बुक पर शुरू हुए, तनतना कर चले ग़ज़ल के ग्रुप्स का हाल देख रहे होंगे। कुछ समय बहुत उजाला दिखाई दिया और फिर एक दूसरे की आलोचनाओं ने हर तरफ़ कालिख फैला दी। आप इस पोर्टल के आशिक़ हैं, यहाँ ऐसा होना आपको भी पसंद नहीं आयेगा, अतः मुझे अपने कॉमेंट हटाने की धृष्टता के लिए क्षमा कीजिये।

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