9 टिप्पणियाँ

सुना है मैं ने वो पछता रहा है-पूजा भाटिया

सुना है मैं ने वो पछता रहा है
यक़ीं, लेकिन किसे अब आ रहा है

मैं कैसे आइने को तोड़ दूँ अब
ये अरसे तक मेरा चेहरा रहा है

अभी आते हुए देखा है उसको
यक़ीं आता नहीं वो जा रहा है

ये दुनिया चार दिन का खेल माना
समझ ये खेल किसको आ रहा है?

मेरे चेहरे पे क्या लिखा है ऐसा?
जिसे देखो मुझे समझा रहा है

मैं उसकी हो रहूंगी तय है इक दिन
पता है, फिर भी दिल घबरा रहा है

ग़मों का उसके अंदाज़ा है तुमको ?
वो दरिया हो के भी प्यासा रहा है

यक़ीं कैसे करूँ मैं वक़्त पर भी
ये ख़ुद पल पल बदलता जा रहा है

उठा कर मुंह यूँ ही चलने को हो तुम
न जी पाये न मरना आ रहा है

न जाने क्या मिला है मुझको पा कर
न जाने क्यों वो यूँ इतरा रहा है

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9 comments on “सुना है मैं ने वो पछता रहा है-पूजा भाटिया

  1. मेरे चेहरे पे क्या लिखा है ऐसा?
    जिसे देखो मुझे समझा रहा है

    kya kahne Pooja ji
    bahut achhii gazal hui hai
    dheron daad

    Alok

  2. मैं कैसे आइने को तोड़ दूँ अब
    ये अरसे तक मेरा चेहरा रहा है

    Pooja ji…. kya achha sher keh diya aapne..
    Waah waah waah….

    Poori ghazal bahut achhi hai 🙂

  3. उम्दा ग़ज़ल !!
    Second last and third last शेर मुझे बहुत पसंद आये..

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