22 टिप्पणियाँ

T-23/24 उम्मीद की अलख सी जगाई हुई तो है-इरशाद ख़ान सिकन्दर

उम्मीद की अलख सी जगाई हुई तो है
दुनिया की साख हमने बचाई हुई तो है

यूँ दश्त-दश्त ख़ाक उड़ाते हो किस लिये
हमने भी चोट इश्क़ में खाई हुई तो है

मुमकिन है इस ज़मीन में ग़ज़लों के गुल खिलें
तरतीब से ग़मों की बुआई हुई तो है

सूखा पड़ा हुआ था यहाँ अब है ख़ाक नम
आँखों की यानी रात सिंचाई हुई तो है

कहने को हाथ-पाँव की ज़ंजीर खुल गयी
होने को क़ैदियों की रिहाई हुई तो है

आ जाओ इससे पहले कि ले ले अगस्त जाँ
अब जैसे तैसे पार जुलाई हुई तो है

अब देखिये ये इश्क़ कहाँ तक हो कामयाब
हमने ग़ज़ल से आँख लड़ाई हुई तो है

एजाज़ हों कि पैसे उन्हीं पर हैं मेहरबाँ
कुछ मसख़रों ने धूम मचाई हुई तो है

पाऊँ कहाँ मैं गाँव, वो बारिश, वो बचपना
काग़ज़ की एक नाव बनाई हुई तो है

शादी भी हो ही जायेगी लगता है अबके साल
मेरी उदासियों से सगाई हुई तो है

इरशाद ख़ान सिकन्दर 09818354784

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

22 comments on “T-23/24 उम्मीद की अलख सी जगाई हुई तो है-इरशाद ख़ान सिकन्दर

  1. सूखा पड़ा हुआ था यहाँ अब है ख़ाक नम
    आँखों की यानी रात सिंचाई हुई तो है

    कहने को हाथ-पाँव की ज़ंजीर खुल गयी
    होने को क़ैदियों की रिहाई हुई तो है

    पाऊँ कहाँ मैं गाँव, वो बारिश, वो बचपना
    काग़ज़ की एक नाव बनाई हुई तो है

    वाह!! वाह!! वाह !!
    कमाल है साहब
    बहुत खूब!!
    कामयाब ग़ज़ल के लिए बधाई

  2. lajwaab ashaar se aarasta khoobsoorat ghazal
    behtreen fikr behtreen andaz

  3. उम्मीद की अलख सी जगाई हुई तो है
    दुनिया की साख हमने बचाई हुई तो है

    Waah..
    Kya badhiya matla hai.
    Khoobsoorat ghazal ke liye mubaarak irshaad bhaai.

  4. UMDA GHAZAL KE LIYE MUBAARAKBAAD PESH KARTA HU’N, SIKANDAR SAHAB QABOOL FARMAAYE’N.

  5. waaah waaah waaah waaaah kya khoob ashaar huye haiN lajawaab ghazal

  6. कहने को हाथ-पाँव की ज़ंजीर खुल गयी
    होने को क़ैदियों की रिहाई हुई तो है

    पाऊँ कहाँ मैं गाँव, वो बारिश, वो बचपना
    काग़ज़ की एक नाव बनाई हुई तो है

    इरशाद भाई जियो – क्या कमाल की ग़ज़ल हुई है , हर शेर नगीना है। दाद कबूलें

  7. इरशाद साहब,

    पाऊँ कहाँ मैं गाँव, वो बारिश, वो बचपना
    काग़ज़ की एक नाव बनाई हुई तो है

    शादी भी हो ही जायेगी लगता है अबके साल
    मेरी उदासियों से सगाई हुई तो है
    वाह वाह।

  8. kya achhi ghazal hai dada
    आ जाओ इससे पहले कि ले ले अगस्त जाँ
    अब जैसे तैसे पार जुलाई हुई तो है
    kya naya kafiya nibhaiya hai apne ..waah ..daad
    -Kanha

  9. वाह…..वाह।
    क्‍या खूब ग़ज़ल कही इरशाद भाई।
    दाद…..दाद….दाद….।

  10. Aa jao is se pahle ki le le August jaan…..
    Bhai waaaahhhhhhhh
    Irshaad ji behtareen ashaaron se buni hae aapki gazal…
    Dher sari taliyon ke saath dher sari badhayi qubool farmayein..
    Sadar
    Pooja

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: