24 टिप्पणियाँ

T-23/23 चश्मे-करम अब उसकी ऐ भाई हुई तो है-शफ़ीक़ रायपुरी

चश्मे-करम अब उसकी ऐ भाई हुई तो है
मुश्किल मिरी पहाड़ से राई हुई तो है

चारागरों ने आस जगाई हुई तो है
‘ये ज़ख़्मे-दिल है इसकी दवाई हुई तो है’

अब टूटता है देखिये किस-किस का ऐतबार
अफ़वाह दुश्मनों ने उड़ाई हुई तो है

करता है बात-बात पे बेबात की वो बात
कुछ बात उसके मन में समाई हुई तो है

नफ़रत की तीरगी से चला आ निकल के अब
शम्मे-ख़ुलूस हमने जलाई हुई तो है

ये और बात है उसे आया नहीं यक़ीं
मेरी तरफ से सुल्ह-सफ़ाई हुई तो है

नाहक़ किसी के ख़ून से उनको नहीं ग़रज़
ख़ुश हैं हथेली उनकी हिनाई हुई तो है

मैं ही नहीं हूँ उसकी मुहब्बत में अश्कबार
उस शख़्स की भी आँख भर आई हुई तो है

ढूंढो ग़मो-अलम के अंधेरों में अब कहीं
नन्हीं किरण ख़ुशी की घर आई हुई तो है

देखो ग़ज़ल के तन प कहीं दाग़ तो नहीं
दरिया-ए-फ़न में वैसे नहाई हुई तो है

रहते हैं हम ‘शफ़ीक़’ अब आज़ाद कितने दिन
क़ैदे-ग़मो-अलम से रिहाई हुई तो है

शफ़ीक़ रायपुरी 09406078694

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24 comments on “T-23/23 चश्मे-करम अब उसकी ऐ भाई हुई तो है-शफ़ीक़ रायपुरी

  1. करता है बात-बात पे बेबात की वो बात
    कुछ बात उसके मन में समाई हुई तो है

    Kya kahne shafiq bhai.
    Mubaarak.

  2. Kya hi khoob gazal huyi hai Shafiq Sahab; rai aur pahad ka toh koi jawaab hi nahi hai. Dili mubarakbaad kubool kare..

  3. Shafeeq bhai, kya hi khoobsurat gazal huyi hai. Aap ki gazal padh ke besaakta hi yeh sher ho gaya, jo aapki nazar karta hoo…
    Bazm-e-sukhan mein aapki pyari si yeh gazal
    naqd-o-nazar ko choom ke aayi hui to hai!

  4. वाह वाह वाह
    बहुत ख़ूब

  5. मैं ही नहीं हूँ उसकी मुहब्बत में अश्कबार
    उस शख़्स की भी आँख भर आई हुई तो है

    वाह वाह ढेरों दाद कबूलें

  6. शफ़ीक साहब,

    करता है बात-बात पे बेबात की वो बात
    कुछ बात उसके मन में समाई हुई तो है
    बहुत ख़ूब

  7. शफ़ीक़ साहब … बहुत खूब… वाह
    Daad
    -Kanha

  8. पहाड़ से राई होने का जवाब नहीं शफ़ीक़ साहब। वाह…वा।
    सारी ग़ज़ल बहुत खूब।

  9. Behtareen ghazal hui…pahaad se raai …bahut umda kya kahne …mubark baaf qubul keejiye shafique raipuri sahab..

  10. Waah Shafiqe sahab.. umda gazal.ke liye daad qubool farmayein..
    Sadar
    Pooja

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