9 टिप्पणियाँ

T-23/16 हम से हमेशा एक बुराई हुई तो है-नाज़िम नक़वी

हम से हमेशा एक बुराई हुई तो है
दुनिया मिली है जब भी लड़ाई हुई तो है

इतने हसीन चेहरे कहां होते हैं मियां
तस्वीर थोड़ी तेरी बनाई हुई तो है

अब चाहे जो भी बोले अदालत का फ़ैसला
ये आग दोस्तों की लगाई हुई तो है

हालांकि अपने हाथ में परचम है अम्न का
हमने भी आस्तीन चढ़ाई हुई तो है

ये बात और अपने भी कुछ साफ़ हो गए
झाड़ू से रास्तों की सफ़ाई हुई तो है

नाज़िम नक़वी 09811400468

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9 comments on “T-23/16 हम से हमेशा एक बुराई हुई तो है-नाज़िम नक़वी

  1. इतने हसीन चेहरे कहां होते हैं मियां
    तस्वीर थोड़ी तेरी बनाई हुई तो है

    Khoob..
    Kya kahne.
    Mubaarak ho naazim bhai.

  2. नाजि़म साहब,

    क्‍या अच्‍दा मतला कहा। वाह वाह

  3. हालांकि अपने हाथ में परचम है अम्न का
    हमने भी आस्तीन चढ़ाई हुई तो है

    Be-misaal…waah…

  4. जनाब नाजि़म नक़वी साहब।
    वाह..।
    क्‍या खूब।
    दाद कबूल फ़रमाएं।
    सादर
    नवनीत

  5. हम से हमेशा एक बुराई हुई तो है
    दुनिया मिली है जब भी लड़ाई हुई तो है

    UMDA SHER MUBAARAKBAAD QABOOL KARE’N, AISA HI HOTA

    YU’N WAJ’H – E – IKHTILAAF MIRI ZAAT HO GAYI
    SACH HAM NE KAH DIYA THA BURI BAAT HO GAYI
    (SHAFIQUE RAIPURI)

  6. क्या बात है नक़वी साहब।
    बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है।
    बहुत बहुत मुबारकबाद

    नकुल

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