12 टिप्पणियाँ

T23/11 चेहरे पे कांति प्यार की छाई हुई तो है- चंद्रभान भरद्वाज

चेहरे पे कांति प्यार की छाई हुई तो है
हर याद उसकी मन में सवाई हुई तो है

हमको समय ने बाँध के रक्खा अलग अलग
पर हमने प्रीति -रीति निभाई हुई तो है

मजबूरियों ने पास तो आने नहीं दिया
पर अपनी हर ग़ज़ल में वो आई हुई तो है

ये बात है अलग कि वो भर ही नहीं सका
ये जख्मे दिल है इसकी दवाई हुई तो है

चहरे पे मुस्कुराहटें हरदम बनी रहीं
अपनी कभी कभी यों लड़ाई हुई तो है

आते ही उसके वज़्म में धुन भूल ही गए
यों उसके पहले धुन ये बजाई हुई तो है

लगते भले हों देह से वो पास पास हैं
उनके दिलों के बीच में खाई हुई तो है

क्या क्या प्रमाण देगा वो अपनी सफाई में
हर ओर उसने आग लगाई हुई तो है

वो नाम ले के अपना सुनाने चले ग़ज़ल
जो ‘भारद्वाज ‘ जी ने सुनाई हुई तो है

– चंद्रभान भरद्वाज
09826025016

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12 comments on “T23/11 चेहरे पे कांति प्यार की छाई हुई तो है- चंद्रभान भरद्वाज

  1. आ. चंद्रभान भारद्वाज जी,
    दाद स्‍वीकार करें।
    सादर
    नवनीत

  2. ख़ूबसूरत गिरह और शानदार अश’आर से सजी इस ग़ज़ल के लिए दिली दाद कुबूल करें चन्द्रभान साहब

  3. ye baat alag hai k ye bhAr hi nahiN sAka……..wah kya girah lagayi hai janab,,,bahut khoob….daad qubool farmayen

  4. ye baat hai alag k wo bhAr hi nahiN sAka……kya kehne khoob girah lagayi hai janab….daad qubool fArmayen

  5. मजबूरियों ने पास तो आने नहीं दिया
    पर अपनी हर ग़ज़ल में वो आई हुई तो है KYA BAAT HAI चंद्रभान भरद्वाज” JI

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