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T-23/5 अक्सर जहाँ में मेरी हँसाई हुई तो है-शाज़ जहानी

अक्सर जहाँ में मेरी हँसाई हुई तो है
पर बात दिल की दिल में छुपाई हुई तो है

अब सरगरां न होइए, मेरी खता नहीं
तरकीब आपकी ही बताई हुई तो है

सदशुक्र हाल क़ब्ल से बदतर है अब मिरा
“ये ज़ख़्मे-दिल है इसकी दवाई हुई तो है”

मंज़िल भी आ ही जाएगी उम्मीद थी उसे
मायूस मेरी आबलापाई हुई तो है

गर पैदली शिकस्त का है शौक़, जाइये
उसने नई बिसात बिछाई हुई तो है

ढह पाये जो न सद्दे-सिकंदर नहीं है ये
दीवार आप-हम ने बनाई हुई तो है

है पेश-पेश हाथ में जो बाल्टी लिए
ये आग भी उसी की लगाई हुई तो है

बरसे बिना निकल न कहीं जाये फिर से ये
बदली समा पे देर से छाई हुई तो है

बोसा लिया ज़रूर है अहमर गुलाब का
लाली तिरे लबों की चुराई हुई तो है

दिल में सजा रखा है तिरी याद का हुजूम
वीरान में ये बस्ती बसाई हुई तो है

कल थीं किसे नसीब जो आसाइशें हैं अब
इस नस्ले-नौ से सबकी भलाई हुई तो है

अब भी हैं ग़ैर के लिए पंचाधिकम् शतम
आपस में भाइयों के लड़ाई हुई तो है

नौबत ये आ पड़ी है कि क़श्क़ोल बिक गया
इस मश्ग़ले में वरना कमाई हुई तो है

ऐ ‘शाज़’ कर दुआ कि पिज़ीराई भी मिले
फ़िलहाल शायरों में रसाई हुई तो है

शाज़ जहानी 09350027775

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14 comments on “T-23/5 अक्सर जहाँ में मेरी हँसाई हुई तो है-शाज़ जहानी

  1. Shaaz sahab..
    Daad kubool kijiye.

  2. मंज़िल भी आ ही जाएगी उम्मीद थी उसे
    मायूस मेरी आबलापाई हुई तो है

    Lajawab Ghazal…dheron daad kaboolen

  3. शाज़ साहब।
    खूबसूरत ग़ज़ल की रसाई भी खूब हुई और पिजी़राई पर भी किसी को शुब्‍हा नहींं है।
    बहुत अच्‍छी ग़ज़ल हुई।
    दाद हाजि़र है।
    सादर
    नवनीत

  4. बहुत ख़ूब शाज़ साहब। अच्छी ग़ज़ल के लिए दाद कुबूल करें

  5. क्या बात है शाज़ साहब!
    शानदार ग़ज़ल हुई। हर शे’र क़माल

    बधाई
    नकुल

  6. Shaaz Sahab, achhi gazal hai ..
    is sher pe daad qubul farmaye ..

    दिल में सजा रखा है तिरी याद का हुजूम
    वीरान में ये बस्ती बसाई हुई तो है

  7. मंज़िल भी आ ही जाएगी उम्मीद थी उसे
    मायूस मेरी आबलापाई हुई तो है

    UMDA SHER

  8. kya kya sher kahe haiN aap ne…wahh wahhh

  9. Bahut umdaa ghazal shaz sahab..badhai

  10. Bahut achi gazal hui shaz sahab
    Dili daad kubul kijiye

  11. बेहद उम्दा ग़ज़ल के लिए दाद कबूल करे शाज़ साहब….

  12. अच्छी ग़ज़ल हुई है शाज़ साहब।
    दिलो दाद क़ुबूल करें।
    सादर
    पूजा

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