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T-23/2 काली घटा नसीब पे छाई हुई तो है-दिनेश नायडू

काली घटा नसीब पे छाई हुई तो है
यानी बहार ज़ख़्मों पे आई हुई तो है

ख़ाहिश है तुम ही दश्त में हमको करो तलाश
आवाज़ वैसे सबको लगाई हुई तो है

तन्हाइयों में शाम बितानी है आज फिर
सिगरट भी खैर हमने जलाई हुई तो है

क्यों कह रहे हैं आपको हम भूल भी गये
माज़ी की लाश हमने उठाई हुई तो है

वैसे तो अश्क अश्क गँवाया है जान को
लेकिन अभी भी आस लगाई हुई तो है

मुमकिन है अब की बार मिले हमको ज़िंदगी
रफ़्तार हमने अपनी बढ़ाई हुई तो है

मुमकिन है क़हक़हों का फ़ज़ाओं में रक़्स हो
आँखों से आँसुओं की विदाई हुई तो है

फिर भी तुम्हारे लम्स की दरकार है इसे
ये ज़ख़्मे-दिल है इसकी दवाई हुई तो है

दिनेश नायडू 09303985412

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16 comments on “T-23/2 काली घटा नसीब पे छाई हुई तो है-दिनेश नायडू

  1. बहुत बढिया जी दिनेश जी

  2. ख़ाहिश है तुम ही दश्त में हमको करो तलाश
    आवाज़ वैसे सबको लगाई हुई तो है

    Kya kahne dinesh bhai..
    Daad kubool kijiye.

  3. ख़ाहिश है तुम ही दश्त में हमको करो तलाश
    आवाज़ वैसे सबको लगाई हुई तो है

    फिर भी तुम्हारे लम्स की दरकार है इसे
    ये ज़ख़्मे-दिल है इसकी दवाई हुई तो है

    Bejod Ghazal aur behtareen girah ke liye dheron daad kaboolo Dinesh Bhai -Jiyo.

  4. aapko dekh kar gumaan hota hai ,,aapka mustaqbil bahut aala hai ,,,bahut khoob shandaar ghazal

  5. दिनेश जी, ग़ज़ल अपनी जगह, इस शै’र की दाद अलग से क़ुबूल हो
    ख़ाहिश है तुम ही दश्त में हमको करो तलाश
    आवाज़ वैसे सबको लगाई हुई तो है

  6. मत्‍ला….गिरह….मक्‍़ता और हर शे’र………….
    टिपिकल दिनेश भाई के रंग वाला।
    वाह..वाह।
    खूब जीएं भाई।
    सादर
    नवनीत

  7. फिर भी तुम्हारे लम्स की दरकार है इसे
    ये ज़ख़्मे-दिल है इसकी दवाई हुई तो है… क्या अच्छी गिरह लगाई है दिनेश साहब… वाह

  8. Dinesh Sab, behtareen gazal
    yeh sher to khoob hai ..

    मुमकिन है क़हक़हों का फ़ज़ाओं में रक़्स हो
    आँखों से आँसुओं की विदाई हुई तो है

  9. फिर भी तुम्हारे लम्स की दरकार है इसे
    ये ज़ख़्मे-दिल है इसकी दवाई हुई तो है
    KHOOB GIRAH LAGI HAI JANAAB

  10. achchhi ghazal…sab se achchhi baat…beshtar sher meN RADEEF chaspaaN hai…bahut khoob

  11. Bahut achi gazal hui bhaia
    Dili daad kubul kijiye

    SAdar

  12. क्यों कह रहे हैं आपको हम भूल भी गये
    माज़ी की लाश हमने उठाई हुई तो है..bahut umdaa ghazal hai bhaiya. waah

  13. Bhai achchi ghazal hui dinesh bhai …tarhi ka behtareen aaghaaz hua ..mubarak baad qubul keejiye..

  14. दिनेश जी
    अच्छी ग़ज़ल हुई है। दाद क़ुबूल करें।
    सादर
    पूजा

  15. बहुत बढ़िया आदरणीय दिनेश जी खूबसूरत ग़ज़ल है गिरह भी खूब लगाई, दिली दाद कुबूल फरमायें

  16. काली घटा नसीब पे छाई हुई तो है
    यानी बहार ज़ख़्मों पे आई हुई तो है

    तन्हाइयों में शाम बितानी है आज फिर
    सिगरट भी खैर हमने जलाई हुई तो है

    Lajawab Ghazal Dinesh…Jiyo

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