Leave a comment

कोई फ़ोर्मेलिटी थोड़े है ‘वन्दे-मातरम’ कहना

सितमगर की ख़मोशी को भले जुल्मो-सितम कहना
पर उस की मुस्कुराहट को तो लाज़िम है करम कहना

मुहब्बत के फ़रिश्ते अब तो इस दिल पर इनायत कर
लबों को आ गया है ख़ुश्क-आँखों को भी नम कहना

हमें तनहाई के आलम में अक्सर याद आता है
किसी का ‘अल्ला-हाफ़िज़’ कहते-कहते ‘बेsssशरम’ कहना

हमें गूँगा न समझें हम तो बस इस वासते चुप हैं
सभी के हक़ में है असली फ़साना कम से कम कहना

सनातन काल से जिस बात का डर था – हुआ वो ही
बिल-आख़िर बन गया फ़ैशन दरारों को धरम कहना

अक़ीदत के सिवा शाइस्तगी भी चाहिये साहब
कोई फ़ोर्मेलिटी थोड़े है ‘वन्दे-मातरम’ कहना

अगरचे मान्यवर कहने से कुछ इज़्ज़त नहीं घटती
मगर हम चाहते हैं आप हम को मुहतरम कहना

नवीन सी चतुर्वेदी
+919967024593

Advertisements

About Navin C. Chaturvedi

www.saahityam.org 09967024593 navincchaturvedi@gmail.com http://vensys.in

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: