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वो रोता ही रहा, उसको मिला क्या-पूजा भाटिया

वो रोता ही रहा, उसको मिला क्या
अरे जीने को कम थी इक दुआ क्या

मुक्कमल हो गया वो हर तरह से
न जाने उसको दुनिया से मिला क्या

ये किस ख़ुशबू से है किरदार महका
ख़ुदा  जाने है आखिर माजरा क्या?

जहां देखूं ,दिखाई दे रहे हो
सराबों ने बढ़ाया दायरा क्या

बदन की चार दीवारी है.. तौबा
ये घर के नाम पर हमको मिला क्या

छतें मायूस है, आया न कोई
पतंगें आसमाँ से है ख़फ़ा क्या

ये पत्ते पेड़ से पूछा किये हैं
हमारे वास्ते तुमने किया क्या

गणित कैसा लगाया ज़िन्दगी ने
घटाया मुझको मुझमें से,बचा क्या

मकाँ के नाम पर ईंटें खड़ी हैं
वो जो घर था यहां,आख़िर हुआ क्या

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6 comments on “वो रोता ही रहा, उसको मिला क्या-पूजा भाटिया

  1. वाह अच्छी ग़ज़ल है पूजा जी दाद ही दाद क़बूल करें

  2. bahut achche sher hue hain puja ji,bahut achchi lagi gazal

  3. बदन की चार दीवारी है.. तौबा
    ये घर के नाम पर हमको मिला क्या

    गणित कैसा लगाया ज़िन्दगी ने
    घटाया मुझको मुझमें से,बचा क्या

    वाह वाह
    -कान्हा

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