5 टिप्पणियाँ

T-22/47 जाइये आप जिधर जाना है-शायर देहलवी

जाइये आप जिधर जाना है
हम को तो लौट के घर जाना है

यार पहरा न लगा फूलों पर
ख़ुश्बुओं को तो बिखर जाना है

हर क़दम ज़ीस्त है इक चौराहा
कौन जाने कि किधर जाना है

अपने आमाल पे भी ग़ौर करो
इनका नस्लों पे असर जाना है

सिर्फ तस्कीने-समाअत के लिए
तुमने हाँ कह के मुकर जाना है

फ़िक्र दरिया की है ये जोहड़ तो
अबकी बरसात में भर जाना है

तू दरे-दिल न खुला रख ‘शायर’
ग़म ने फिर आ के ठहर जाना है

शायर देहलवी 0919968460072, 09911594871

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5 comments on “T-22/47 जाइये आप जिधर जाना है-शायर देहलवी

  1. यार पहरा न लगा फूलों पर
    ख़ुश्बुओं को तो बिखर जाना है

    Aha ha…lajawab waah

  2. हर क़दम ज़ीस्त है इक चौराहा
    कौन जाने कि किधर जाना है
    अपने आमाल पे भी ग़ौर करो
    इनका नस्लों पे असर जाना है______________वाह देहलवी सर क्या कहने हैं ज़बरदस्त ग़ज़ल कही आपने दिली दाद

  3. भई वाह
    बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल हुई है
    आनंद आगया। . ख़ास कर के ये दो शे’र

    अपने आमाल पे भी ग़ौर करो
    इनका नस्लों पे असर जाना है

    फ़िक्र दरिया की है ये “जोहड़” तो
    अबकी बरसात में भर जाना है

    जोहड़ का प्रयोग खूब हुआ।
    अपने गाँव के कच्चे जोहड़ की याद भी आ गयी

    नकुल

  4. अपने आमाल पे भी ग़ौर करो
    इनका नस्लों पे असर जाना है
    वाह

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