7 टिप्पणियाँ

T-22/36 हर तलातुम से गुज़र जाना है-देवेन्द्र गौतम

हर तलातुम से गुज़र जाना है
दिल के दरिया में उत्तर जाना है

ज़िंदा रहना है कि मर जाना है
‘आज हर हद से गुज़र जाना है’

मौत की यार हक़ीक़त है यही
बस ये अहसास का मर जाना है

पेड़ से टूट गए हैं जैसे
खुश्क पत्तों सा बिखर जाना है

सब ज़मींदोज़ उभर आये हैं
अब दुआओं का असर जाना है

वादा करना तो अदा है उनकी
वक़्त आने पे मुकर जाना है

सर खपाने से नहीं होता कुछ
जो गुज़रना है गुज़र जाना है

वक़्त के आइना दिखलाते ही
रंग चेहरे का उतर जाना है

हम तो आवारा हैं ‘गौतम’ साहब
आप कहिये कि किधर जाना है

देवेन्द्र गौतम 08860843164

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7 comments on “T-22/36 हर तलातुम से गुज़र जाना है-देवेन्द्र गौतम

  1. bharpoor gazal huii hai sahab..waah waahh waahh

    dili daad
    regards
    Alok

  2. बस ये अहसास का मर जाना है… वाह वाह….क्या कहने….अच्छी ग़ज़ल….बहुत बहुत बधाई
    ….

  3. मौत की यार हक़ीक़त है यही….वाह क़माल का शेर है गौतम जी।
    ढेरों दाद क़ुबूल करें
    सादर
    पूजा

  4. मौत की यार हक़ीक़त है यही
    बस ये अहसास का मर जाना है
    ये शे’र क्‍या बात है आदरणीय देवेंद्र गौतम साहब। तमाम ग़ज़ल पसंद आई।

  5. acchi ghazal devebdra sahab… bataure khas मौत की यार हक़ीक़त है यही
    बस ये अहसास का मर जाना है ye sher pasand aaya… daad qubulen

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