16 टिप्पणियाँ

T-22/34 दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के ….मयंक अवस्थी

तीरगी !! तुझको बिखर जाना है

शब को ताहद्दे सहर जाना है

चाँद तारों से हमें क्या हासिल ?!!

रात का रूप संवर जाना है

आग की राहगुज़र है दरपेश

अब मुझे और निखर जाना है

ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना

उसके कूचे से गुज़र जाना है

कब ये पूछा है किसी सूरज ने

उसकी किरनों को किधर जाना है

दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के

“आज हर हद से गुज़र जाना है”

हम तो काबा भी चले जायें, वले

दिल ये जायेगा जिधर जाना है

उसकी दुनिया में उसी की मर्ज़ी

हम तो रुक जायें,मगर जाना है

मेरे शानो का सहारा ले लो

चाँद तारों पे अगर जाना है

देखना आज नहीं तो इक दिन

आइना तुम को अखर जाना है

ज़ायका है ये मुहब्बत का “मयंक”

ज़हर को तूने शकर जाना है

मयंक अवस्थी (8765213905)

Advertisements

16 comments on “T-22/34 दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के ….मयंक अवस्थी

  1. देखना आज नहीं तो इक दिन
    आइना तुम को अखर जाना है

    Mayank Bhai ki tareef ke liye mere paas alfaaz nahin hain…Kya kahun ? Zindabaad Zindabaad…

  2. kya hi achhii gazal hui hai bhaiya
    tamam gazal hi khoobsoorat hai

    dili mubarakbad

    regards
    Alok

  3. वाह मयंक भाई क्या बात है ख़ूब ग़ज़ल कही है दाद ही दाद

  4. ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    कब ये पूछा है किसी सूरज ने
    उसकी किरनों को किधर जाना है

    वाह सर जी वाह बधाई ………………..

  5. आग की राहगुज़र आ ही गई
    मुझको अब और निखर जाना है

    ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    Aadarniya mayank dada…..bahut achhi gazal hui hai….ye do sher behad pasand aaye….waah…

  6. Mayank bhai aapki tarah tafseeli daad to naheeN de sakta lekin behad umda nae mazameen se labrez behetreen ghazal hui hai.. dili daad!!

  7. आदरणीय मयंक भाई साहब,

    सारी ग़ज़ल बहुत खू़बसूरत हुई है। हमेशा की तरह।

    तीरगी !! तुझको बिखर जाना है
    शब को ताहद्दे सहर जाना है
    वाह…वाह..।

    चाँद तारों से हमें क्या हासिल ?!!
    रात का रूप संवर जाना है

    वाह..वाह..

    आग की राहगुज़र आ ही गई
    मुझको अब और निखर जाना है

    जो बतौर इंसान और बतौर शायर कुंदन हो, यह दावा उसी का हो सकता है और बहुत सच्‍चा दावा है मयंक भाई साहब।

    ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    हाय…. ये शे’र मेरे बहुत करीब है। उन दिनों की याद दिलाता है जब मैं शिमला से रात को चल कर सुबह पालमपुर पहुंचने वाली सरकारी बसों के शीशे छूकर देखता था… थके हुए इंजिन की आवाज़ सुनता था…बस को छू कर कुछ महसूस करता था….और यह सोचता था कि मैं किसी को छूकर आया हूं।
    उसी दौर में एक शे’र हुआ था :

    जिंदगी के करीब लाता है
    तेरी बस्‍ती में मेरा घर होना !!!!!

    लेकिन आपका शे’र उस्‍तादाना है। प्रणाम।

    कब ये पूछा है किसी सूरज ने
    उसकी किरनों को किधर जाना है

    सार्वभौमिक तथ्‍य को बहुत सुंदर ढंग से ककहा आपने।

    दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के
    “आज हर हद से गुज़र जाना है”
    वाह…गिरह बाकमाल।

    हम तो काबा भी चले जायें, वले
    दिल ये जायेगा जिधर जाना है
    …………………….
    आह…।

    सादर
    नवनीत

  8. bhaiya acchi ghazal hui hai…. saare she’r acche hue hain… daad qubuliye….

  9. KHOOB SOORAT GHAZAL MAYANK SAHAB, KHAAS KAR YE SHER

    ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना = उसके कूचे से गुज़र जाना है ZINDAGI KA MAQSAD KAHIYE YA ZINDAGI KI MUKAMMAL TAAREEF, 2 MISRO’N ME’N AAP NE JAHAAN-E-ISHQ ME’N ZINDAGI KA FALSAFA BAYAAN KAR DIYA HAI, WAAH MAYANK SAAHAB,
    MUBAARAKBAAD QABOOL KARE’N.

  10. Wahhhhhhhh wahhhhhhhhhhh
    BAhut achi gazal hui sir
    DIli daad kubul kijiye

    SAdar
    IMran

  11. zindagi tera mukammal hona
    uske kooche se guzar jana hai.
    kya khoobsurat shei’r kaha hai Mayank saheb. Daad qubool karen.

  12. तीरगी !! तुझको बिखर जाना है
    शब को ताहद्दे सहर जाना है वाह ….. कामयाब मतला हुआ है शब की हद सहर के आस्तां पर जाकर दम तोड़ देती है |इस अँधेरे को बिखर जाना है \सुबह का रूप संवर जाना है |

    चाँद तारों से हमें क्या हासिल ?!!
    रात का रूप संवर जाना है………….क्या खूब ….काली रात के रूप को चाँद तारों से संवारा जाना कायनात बनाने वाले के सोन्दर्य बोध की खुबसूरत बानगी है |

    आग की राहगुज़र आ ही गई
    मुझको अब और निखर जाना है……..आग में तपकर कुंदन हो जाना , सोने को इस परीक्षा पर खरा उतरना ही होता है ….डर कैसा ?

    ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है एक मुकम्मल शेर हुआ है …साहब …ढेरों दाद

    कब ये पूछा है किसी सूरज ने
    उसकी किरनों को किधर जाना है……..हम फ़कीरों से न पूछो मंजिल \ज़ीस्त को एक सफ़र जाना है

    दर्दे –दिल!! तुझको इनायत कर के
    “आज हर हद से गुज़र जाना है”………वाह…क्या खूब गिरह लगी है ….बधाई स्वीकार करें

    हम तो काबा भी चले जायें, वले
    दिल ये जायेगा जिधर जाना है ……… दिल पर किसका जोर चला है |…सही कहा आपने
    आदरणीय मयंक सर बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है |हार्दिक बधाई स्वीकार करें |सादर अभिनंदन |

  13. Mayank Ji….

    तीरगी !! तुझको बिखर जाना है
    शब को ताहद्दे सहर जाना है

    ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    कब ये पूछा है किसी सूरज ने
    उसकी किरनों को किधर जाना है

    Kamaal ke sher hue hai… Har Sher ek se badh kar ek….. Bahut Bahut Mubaraqbaad 🙂

  14. ज़िन्दगी!! तेरा मुकम्मल होना
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    कब ये पूछा है किसी सूरज ने
    उसकी किरनों को किधर जाना है

    Ahaa..kya kehne Bhaiya ..waah

    Sadar

  15. ज़िन्दगी!!! तेरा मुकम्मिल होना….
    चाँद तारों से हमें क्या हासिल…
    वाह्ह्ह्ह्ह् क्या खूब अशआर बुने हैं ,मयंक जी आपने।
    बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद क़ुबूल करें।
    सादर
    पूजा

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: