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T-22/32 आशीष नैथानी ‘सलिल’

या मुहब्बत का असर जाना है
या ज़माने को सँवर जाना है

या तो जायेगी मिरी ख़ुद्दारी
या मिरे कांधों से सर जाना है

चाँद तारों को सुलाकर शब को
सुब्ह अम्बर से उतर जाना है

एक बच्चे की हँसी के ख़ातिर
वो डराये, मुझे डर जाना है

उसके हाथों की छुहन का जादू
वक़्त के साथ गुज़र जाना है

पिछले तूफ़ाँ में उड़े थे पंछी
अबके तूफ़ाँ में शजर जाना है

मौसमी चक्र बनाने के लिए
फूल-पत्तों को उतर जाना है

सरहदें अपनी परे रख हमको
“आज हर हद से गुजर जाना है ”

जिस्म मरता है फ़क़त इक ही बार
मौत हर दिन तुझे मर जाना है

आशीष नैथानी ‘सलिल’ 07032703496

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20 comments on “T-22/32 आशीष नैथानी ‘सलिल’

  1. kya khoob gazal kahi hai bhaii

    dher sari daad

    Alok

  2. या मुहब्बत का असर जाना है
    या ज़माने को सँवर जाना है

    या तो जायेगी मिरी ख़ुद्दारी
    या मिरे कांधों से सर जाना है

    चाँद तारों को सुलाकर शब को
    सुब्ह अम्बर से उतर जाना है

    एक बच्चे की हँसी के ख़ातिर
    वो डराये, मुझे डर जाना है
    आशीष साहब ,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है |ढेरों दाद कबूल फरमावें |सादर |

  3. एक बच्चे की हँसी के ख़ातिर
    वो डराये, मुझे डर जाना है

    आशीष भाई साहब। ये शे’र बहुत अच्‍छा है। दाद…दाद…दाद।
    ग़ज़ल के लिए भी दाद।
    सादर
    नवनीत

  4. या मुहब्बत का असर जाना है
    या ज़माने को सँवर जाना है
    मुहब्बत का असर तो जाना नहीं है इसलिये ज़माने को संवरना होगा !! ये बत दीगर है कि इसमे भी ज़माने लगेंगे!1 मतला खूब है !!!
    या तो जायेगी मिरी ख़ुद्दारी
    या मिरे कांधों से सर जाना है
    सानी मिसरे का सौदा बेहतर होगा !! खुद्दारी सर से बहुत ज़ियादा कीमती शै है !! चाँद तारों को सुलाकर शब को
    सुब्ह अम्बर से उतर जाना है
    मंज़रकशी अच्छी है !!!
    एक बच्चे की हँसी की ख़ातिर
    वो डराये, मुझे डर जाना है
    बहुत सुन्दर !! बहुत सुन्दर !! नया और खुश्बूदार शेर है !! एक अलग सा रंग है इसमे प्रेम का और भावना का !!
    पिछले तूफ़ाँ में उड़े थे पंछी
    अबके तूफ़ाँ में शजर जाना है
    तूफान का अगला प्रहार घातक होगा !! शेर की नवीनता बहुत अपील कर रही है !!
    मौसमी चक्र बनाने के लिए
    फूल-पत्तों को उतर जाना है
    ये चमन यूँ ही रहेगा !! … और बागबाँ जाते हैं गुलशन तेरा आबाद रहे !!! एक बार फिर नया और अच्छा शेर कहा है !!!
    सरहदें अपनी परे रख हमको
    “आज हर हद से गुजर जाना है ”
    मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा !!!! सरहदें ने शेर को एक specific domain दिया है जो असरदार है !!!
    जिस्म मरता है फ़क़त इक ही बार
    मौत हर दिन तुझे मर जाना है
    कारगर प्रयोग है और सानी मिसरे की गढन भी प्रभावशाली है !!
    आशीष नैथानी ‘सलिल भाई !! ग़ज़ल के लिये दाद कुबूल करें –मयंक

  5. ashish ji acchi ghazal hui hai..apne kuch experiments kiye hain aur ye baat behad pasand aayi… daad qubulen

  6. bahut khoob gazal umda sheron ke sath.daad naithani ji………….

  7. umda ghazal k liye mubarakbad.

  8. एक बच्चे की हँसी के ख़ातिर
    वो डराये, मुझे डर जाना है

    पिछले तूफ़ाँ में उड़े थे पंछी
    अबके तूफ़ाँ में शजर जाना है

    Ashish Bhai ek behad achhi Ghazal ke liye bahut bahut Mubaraqbaad…

  9. Kya umdaa ghazal hui hai Aashish bhai..
    Bachchhe wale she’r pe khaas taur pe daad
    -Kanha

  10. उम्दा ग़ज़ल हुई है सलिल साहब
    बधाई स्वीकार करें
    सादर
    पूजा

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