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T-22/28 हुक्मरानी का हुनर जाना है-आसिफ़ ‘अमान’

हुक्मरानी का हुनर जाना है
वादा करना है, मुकर जाना है

कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
यह भी इक क़िस्म का मर जाना है

तुमको आदाबे-सफ़र क्या मालूम?
तुमने चलने को सफ़र जाना है

मेरे अश्कों को तबस्सुम बनकर
उसके होंठों पे बिखर जाना है

उनसे ही रब्त रखा कीजे फ़िर
उनकी बातों प अगर जाना है

अब मिरी प्यास है शामिल उसमें
अब तो सहरा को निखर जाना है

उसके आंसू भी मुझे रोकेंगे
‘आज हर हद से गुज़र जाना है’

लौट आयेगा, अमान आसिफ़ को
उसने थोडा भी अगर जाना है

आसिफ़ ‘अमान’ 09971929082

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26 comments on “T-22/28 हुक्मरानी का हुनर जाना है-आसिफ़ ‘अमान’

  1. तुमको आदाबे-सफ़र क्या मालूम?
    तुमने चलने को सफ़र जाना है

    Lajawab Ghazal…Kamaal

  2. bahut achhii gazal huii Asif bhaii

    dili daad qbul keejiye
    Alok

  3. कोई जीता ही नहीं मेरे लिए
    यह भी इक किस्म का मर जाना है वाह …वाह

    उसके आंसू भी मुझे रोकेंगे…. वाह… No comments

  4. हुक्मरानी का हुनर जाना है
    वादा करना है, मुकर जाना है

    कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
    यह भी इक क़िस्म का मर जाना है

    तुमको आदाबे-सफ़र क्या मालूम?
    तुमने चलने को सफ़र जाना है

    मेरे अश्कों को तबस्सुम बनकर
    उसके होंठों पे बिखर जाना है
    आसिफ़ साहब ,मेयारी ग़ज़ल हुई है ,हर एक शेर दिल को छू गया है |सभी अशआर उम्दा है ,मतले ने एक आम कहन को ख़ास अंदाज़ दिया है |ढेरों दाद कबूल फरमावें |सादर

  5. कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
    यह भी इक क़िस्म का मर जाना है

    तुमको आदाबे-सफ़र क्या मालूम?
    तुमने चलने को सफ़र जाना है

    अब मिरी प्यास है शामिल उसमें
    अब तो सहरा को निखर जाना है

    सारे शे’र बहुत अच्‍छे लेकिन इन्‍हें साथ रखूंगा। वाह..वाह..वाह..।
    इंतज़ार था आपकी ग़ज़ल का आसिफ भाई।
    सादर
    नवनीत

  6. कमाल के शेर कहे हैं आसिफ भाई !!!
    हुक्मरानी का हुनर जाना है
    वादा करना है, मुकर जाना है
    आसानी और गहराई और क्या चाहिये मतले में !! भरपूर है !! तंज़ है !!
    कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
    यह भी इक क़िस्म का मर जाना है
    क्या बात निकाली है !! वाह वाह !! एक अभिशप्त तनहाई का बेहद असरदार स्वर मुखरित हुआ है शेर में !!!!
    तुमको आदाबे-सफ़र क्या मालूम?
    तुमने चलने को सफ़र जाना है
    ग्रेट !! एक शेर कि “”शक न कर मेरी खुश्क आँखों पर // यूँ भी आँसू बहाये जाते हैं”” –जैसा ही खूबसूरत !!!
    मेरे अश्कों को तबस्सुम बनकर
    उसके होंठों पे बिखर जाना है
    बहुत खूब !! कुहसार के अश्कों से आबाद समन्दर है !!!
    अब मिरी प्यास है शामिल उसमें
    अब तो सहरा को निखर जाना है
    फिर गहरी बात !!! क़ैस हो या हुसैन सभी शुमार हैं आपके शेर में !!!
    उसके आंसू भी मुझे रोकेंगे
    ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’
    ज़ब्त की इंतेहा पर खडा है शेर क्योंकि मेरी सरहद इस शेर में है — मैं शिकस्त दे चुका था कभी बहरे बेकराँ को
    मैं शिकस्त खा गया हूँ किसी अश्के बेज़ुबाँ से –मयंक
    लौट आयेगा, अमान आसिफ़ को
    उसने थोडा भी अगर जाना है
    लहजा और अल्फाज़ पर इख़्तियार देखते ही बनता है !!! कहन शिल्प और तहदारी हर लिहाज से बेहद खूबसूरत गज़ल कही है आपने आसिफ भाई !! दाद दाद दाद!! –मयंक

  7. bahut badhiya ghazal hai asif bhai….

    तुमको आदाबे-सफ़र क्या मालूम?
    तुमने चलने को सफ़र जाना है

    अब मिरी प्यास है शामिल उसमें
    अब तो सहरा को निखर जाना है
    ye do sher to bahut hi pasand aaye… daad qubulen

  8. Asif bhai, achchi ghazal k liye mubarakbaad.

  9. उसके आंसू भी मुझे रोकेंगे
    ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’

    Issey achhi Tazmeen mere khayaal se is zameen mein nahin aa sakti … Kya achhi girah baandhi hai aapne Asif bhai…

    Aur ye sher

    कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
    यह भी इक क़िस्म का मर जाना है

    Kya achha hai bhai… kya achha hai….Waah Waah

    Ghazal Padh kar maza aa gaya !!!

    • Dinesh bhai jab aapne itni khoobsurat shuruaat di is mushayre ko to laga ki isse achchi ghazal aur kya hogi aur abhi bhi aisa hi lag raha hai.. baki aapko ghazal pasand aai iske liye shukriya!!

  10. कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
    यह भी इक क़िस्म का मर जाना है.. kya kehne bhai ..waah waah..umda ghazal

    -Kanha

  11. Bahut achi gazal hui asif sahab
    DIli daad kubul kijiye

  12. Koi jeeta hi nahi mere liye…..waaahhhh
    Umda gazal
    Badhai swikaar karein
    Sadar
    Pooja

  13. कोई जीता ही नहीं मेरे लिये
    यह भी इक क़िस्म का मर जाना है ……वाह

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